बदलाव का संकेत दे रहा है मतदान का प्रतिशत

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पूरे राजस्थान में 15वीं विधानसभा के चुनाव में मतदान का 72 प्रतिशत हैं। यह बम्फर मतदान निश्चित रूप से बलाव का संकेत दे रहा है। टी.वी. चैनलों ने भी सत्ता परिवर्तन के संकेत अवश्य दिए हैं। लेकिन राजस्थान में इस बार जो भारी मतदान हुआ उसमें युवावर्ग ने जमकर मतदान किया। गांव, शहर और कस्बों में भारी मतदान हुआ। शांतिपूर्ण रहा मतदान। लगभग सभी केन्द्रों पर मतदान व्यवस्था में चुस्ती, फुर्ती एवं व्यवस्थित व्यवस्था दिखी। कुछ जगह व्यवधान हुआ लेकिन वह इतने विशाल प्रदेश में यह नगण्य है। जिस राजस्थान में 1952 के पहले चुनाव में मुश्किल से 35 प्रतिशत मतदान हुआ हों वहां 66 साल बाद 72 प्रतिशत मतदान होना एक सुखद लोकतांत्रिक व्यवस्था के निरन्तर विकास का भी संकेत है। मतदान का यह प्रतिशत अंतिम प्रतिशत गणना के बाद तनिक बढ़ भी सकता है। यह आंकड़ा 75 प्रतिशत भी पार कर सकता है। मतदाताओ ने इस लोकतंत्र के महोत्सव में बढ़ चढ़कर उत्साह के साथ भाग लिया। चुनाव के दौरान फैली कटुता भी आज मतदान के साथ ही समाप्त हो गई। अब नया अध्याय शुरू होगा। 11 दिसम्बर के बाद, जब मतगणना के परिणाम आएंगे। लेकिन भारतीय लोकतंत्र एवं यहां की जनतांत्रिक व्यवस्था व पंच परमेश्वर की आस्था के सरकार इन चुनावों में मजबूत ही हुए है। अब निर्भर करता है कि सभी दलों के राजनेता इस व्यवस्था और उसकी परम्परा के अनुसार व संवैधानिक तरीके उसे कितना समृद्ध व सुदृढ़ बनाते हैं। आज देश में सहिष्णुता, सौहार्द, राजनीतिक शुचिता एवं संवैधानिक मूल्यों के प्रति अधिक जागरूक रहकर उसे जन मानस में बढ़ाने की जरूरत है। वह तभी होगा जबकि साध्य के अनुसार साधन अपनाएं जाएं।

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