आज जनतंत्र का 'महोत्सव'

img

राजस्थान की15वीं विधानसभा के लिए अपने उम्मीदवार चुनने का महोत्सव यानी कि मतदान कल प्रात: शुरू हो जाएगा। प्रजातंत्र को मजबूत करने वाले इस महोत्सव में मतदान का प्रतिशत जितना बढ़ेगा, उससे यही इंगित होगा कि इस देश में लोकतंत्र फलफूल रहा है। इस वोट के उत्सव में भाग लेने के लिए भाजपा और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने 21 दिन में करीब 656 चुनाव सभाएं कर डाली। अंतिम यानी 5 दिसम्बर को दौसा में प्रधानमंत्री भी नगाड़े बजाकर गए हैं। लोगों ने कहा भी मोदी थारो ढोल बाजे - ढोल...... बाजे रै, लेकिन विजय का ढोल तो तभी बजेगा जबकि राजस्थान का मतदाता कल प्रचण्ड मतदान करेगा। वर्ष 1952 में जहां राजस्थान में 11 दिनों तक मतदान का दौर चला वहीं आज एक ही दिन में राज्य की 199 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हो जाएगा। पिछले 66 वर्षों में भारत में लोकतंत्र मजबूत तो हुआ है लेकिन इसे मजबूत करने के लिए संवेदनशीलता, सहिष्णुता और प्रजातांत्रिक मूल्यों पर समर्पण की आवश्यकता है उसकी धुरी को भी मजबूत करने की जरूरत है। आज का चुनाव प्रचार व्यक्तिगत आरोपों, प्रत्यारोपों और कटुता से भरा है। इसमें तभी सुधार आएगा जब देश और प्रदेश का युवा मतदाता मूल्य आधारित राजनीति की ध्वजा को बुलन्द कर फहराएगा। चुनाव-प्रचार की गरिमा बनाए रखने के लिए गंभीर प्रयास जरूरी है। जैसे राजनीति में सब जायज है  का जुमला चल पड़ा है, वैसे ही चुनाव में सब जायज है का जुमला न चले। इसमें सत्तारूढ़ दल एवं विपक्ष दोनों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर मूल्य साधने होंगे। मतदाता ही लोकतंत्र के सजग प्रहरी है। वे ही उन्हें साध सकते हैं और मूल्यों में बांध सकते हैं। यह तभी होगा जब मतदाता उन्हीं प्रत्याशियों को चुनेंगे जो इन मूल्यों पर विश्वास करते हैं। आज के महोत्सव से हम उसी की शुरूआत करें। क्या ऐसा करेंगे?

tyfu6tu whatsapp mail