कौन किस कमेर में बैठेंगे?

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राजस्थान सचिवालय के मुख्य भवन (पुराने) मंत्रालय भवन (नए) और सी.एम. ओ. (मुख्यमंत्री सचिवालय) के नवनिर्मित भवन में कौन -कौन बैठेंगे, इसकी कवायदे शुरू हो गई है। यह तय है कि सी.एम.ओ. जो कि आधुनिक सुविधाओं से संपन्न एवं साज सज्जायुक्त है, उसमें मुख्यमंत्री बैठेंगे ही। यह फाईबस्टार होटलनुमा भवन पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सुरूचिपूर्ण तरीके से वास्तु सौंदर्य बोध के साथ बनाया था। पूर्व केन्द्रीय मंत्री जयराम रमेश ने जब इस आधुनिक सजा सज्जाओं से युक्त सीएमओ भवन को देखा तो सचमुच प्रसन्न हो गए। क्या इस सीएमओ भवन में डिप्टी सीएम सचिन पायलट भी बैठेंगे? यह प्रश्न कुछ उलझा-उलझा है। हालांकि पायलट ने अपने कमरे के लिए कोई इच्छा जाहिर नहीं की है, लेकिन मीडिया में कयास है कि उप मुख्यमंत्री पुराने मुख्य सचिवालय भवन में पोर्च के ऊपर बने कमरों में ही बैठेंगे। इस उप मुख्यमंत्री भवन की खिडि़कियों से सचिवालय का लॉन, लॉन में स्थापित महात्मा गांधी की प्रतिमा, जनपथ, अशोक कल्ब भी निहार सकते हैं। इसी कमरे में पूर्व मुख्यमंत्री मोहन लाल सुखाडिय़ा से लेकर बर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तक बैठे हैं। इसी प्रथम तल के कमरों में पूरा सी.एम.ओ. कार्यालय था। कुछ दूसरे तले के  कमरे भी इसी सी.एम.ओ.में शामिल थे। पुराने सीएमओ के मुख्यमंत्री कक्ष पहले केबीनेट की बैठकें हुआ करती थी। बाद में ( जो कभी प्रेस रूम हुआ करता था) केबीनेट की बैठकें होने लगी। बाद में पूर्व उप मुख्यमत्री हरि शंकर भाभड़ा को यह कमरा एलॉट कर दिया। पिछली सरकार के समय यह कक्ष पूर्व मंत्री राजपाल सिंह के पास था। कहा जा रहा है कि फिलहाल इसी कक्ष और अब उप मुख्यमंत्री के पास कौन-कौन विभाग होंगे, यह अभी तय नहीं है। कहा यह जा रहा है कि शुरूआत में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत 15 से 20 मंत्री, राज्यमंत्री और उपमंत्री बनाएंगे। इनमें सहयोगी दलों का भी प्रतिनिधित्व होगा। शासन सचिवालय में कमरों का प्रबंधन देखने वाले सूत्रों का कहना है कि कमरे वरिष्ठता के क्रम से ही कमरों का निर्धारण होगा। गृह, स्वायत्त शासन, जल संसाधन, पीएचडी, पी डब्ल्यूडी, ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभागों के नवनियुक्त मंत्रियों की इच्छा को संभवत: तरजीह दी जाएगी। सभी संभावित मंत्रियों की नजरें कमरों के नम्बर एवं अंक ज्योतिष की अनुकूलता पर भी टिकी है। राज्यमंत्रियों और उपमंत्रियों को मंत्रालयिक भवन में जगह मिलने की अधिक संभावना है। अब इन्तजार है मंत्रिमंडल के संभावित सदस्यों के चयन, शथप-ग्रहा और विभागों के वितरण की। कांग्रेस एवं सहयोगी दलों के विधायकों की धड़कने इस समय बहुत तेज है। ज्योतिषियों को कुंडली दिखान, नया जोधपुरी कोट एवं शेरवानी सिलवाने में बहुत से विधायक व्यस्त हैं। सभी अशोक गहलोत उनकी मिजाज पूर्सी में लगे हैं। अपना ध्यान आकर्षितकरने के लिए कुछ विधायक अखबारों में पूरे पेज का बधार्ई का विज्ञापन भी दे रहे हैं। कहा ये जा रहा है कि सूचियां बनाने में मुख्यमंत्री और डिप्टी मुख्यमंत्री दोनों ही लगे हैं। कॉमन नामों का चयन भी इन्हीं सूचियों से होगा। इसमें भी दखल कांग्रेस आलाकमान की ही रहेगी।

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