दबा दो घांटकी

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लगता है वो समय आ गया है। जिस की मांग देशवासियों की ओर से की जा रही थी, वो पूरी होने वाली है। उस ने हमें रूलाया अब वो खून के आंसू रोएगा। ऐसा ना हो कि विश्व के नक्शे से उस का नाम-ओ-निशां मिट जाए। लोग दुनिया का नक्शा देख कर बताएंगे कि यहां उस नाम का देश हुआ करता था। इस के लिए करना होगा थोड़ा सा इंतजार। बस, थोड़ा सा इंतजार। शहर की एक हथाई पर आज उसी के चर्चे हो रहे थे। भारत और भारतवासी पिछले चार दिन से उदास हैं। आंखें नम। मन में गुस्सा। मुट्ठियां तनी हुई। नारों से गूंजती फिजां। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक 'वीर शहीदों का बलिदान..याद रखेगा हिन्दुस्तान.. का घोष। शहीदों की अंतिम यात्रा में उमड़े हजारों लोग। हर शहीद की अपनी दास्तां। ऐसा लगा मानों भरी दुपहरिया में सूर्यास्त हो चला हो। ऐसा लगा मानो अपने घर से अंतिम यात्रा रवाना हो रही हो। लगता भी क्यूं नहीं। सैनिक हमारे पहरूए हैं। फौजी हमारे रक्षक हैं। वो जागते हैं तभी तो हम चैन की नींद सोते हैं। फौजी हमारे परिवार के अहम हिस्से हैं। पुलवामा कांड ने जता दिया कि हमें आवाज देकर एक करने की जरूरत नहीं। शहीदों की अंतिम यात्रा के दौरान जो मंजर पेश आए उससे पता चल गया कि हम एक थे..एक हैं..और एक रहेंगे। कमीने पड़ोसी की कमीनी हरकतों से हम टूटने वाले नहीं। शहीदों की अंतिम यात्रा में उमड़े लाखों लोगों ने बता दिया कि अब पड़ोसी की खैर नहीं।
हथाईबाजों को नीचस्तान की हरकतों पर हैरत होती है। भीतर से एकदम खोखला हो जाने के बावजूद वो सुधर नही रहा। वो हम से महज 24 घंटे पहले आजाद हुआ था। चौदह अगस्त 1947 को उस की नींव पड़ी और 15 अगस्त को भारतीय तिरंगा लहराया। आज हम कहां..वो कहां..। हम ने जल-नभ-थल-अंतरिक्ष में झंडे गाड़ दिए और वो आतंकवाद को हवा देने से ऊपर नहीं उठ पा रहा। उसे आतंक की फैक्ट्री चलाने से फुरसत नहीं मिल रही। वो भूखा। वो नंगा। वो  फकीर। वो जाहिल। वो कमीना। वो नीच। वो कंगाल। वो भिखारी। अशिक्षा वहां। गरीबी वहां। भुखमरी वहां। इसके बावजूद वहां के हुक्मरानों की आंखें नहीं खुल रही है। वो हमारे सामने पिद्दा सा। वो हमारे सामने बित्ते भर का। इसके बावजूद पता नहीं क्यूं 'भेजा' ठिकाने नहीं आ रहा। लगता है उस के 'भेजे' के तार सियार वाली कहावत से जुड़े हुए हैं। सियार की मौत आती हैं तो शहर की तरफ भागता है और पाकिस्तान की मौत आई तो भारत के साथ जोरदार पंगा ले लिया। इस की सजा मिलेगी.. बराबर मिलेगी..। हमने उसकी गलतियों-गुस्ताखियों को नजरअंदाज किया तभी तो गुनाह-अपराध पे उतर आया और जानने वाले जानते हैं कि गुनाह की सजा जरूर मिलती है। उस ने तो गुनाह को भी पीछे छोड़कर पाप किया-महापाप किया। जितना बड़ा गुनाह उतनी बड़ी सजा तो बनती है। सजा हमारी सेना तय करेगी। समय हमारी सेना तय करेगी। कब देनी है, तय करना सेना के जिम्मे। हमें हमारी सेना पर पूरा  भरोसा है। वो महापापी को उसी के दड़बे में जाकर ऐसी सजा देगी कि आइंदा पाप-महापाप, अपराध-गुनाह तो दूर की बात, गलती का 'ग' दोहराने से पहले दस बार सोचेगा। पुलवामा कांड के बाद भारत जाहिल पड़ोसी की जिस प्रकार घेराबंदी कर रहा है। ठीक है। भारत ने उससे मोस्ट फेवरेट नेशन का दर्जा वापस ले लिया, ठीक किया। जो काम बहुत पहले हो जाना चाहिए, वो अब हो गया। विश्व के लगभग सारे देश (सिवाय चीन के) जाहिल को मुंह नहीं लगा रहे। सब भारत के साथ। जिस दिन ठुकाई होगी, उन सबका सहयोग रहेगा। कुछ लोगों का कहना है कि भारत अगर सिंधु समझौता तोड़ कर उस का पानी रोक दे तो वो तिरसा मर जाएगा। जिस जमीन पर सिंधु के पानी से सिंचाई होती है वो बंजर हो जाएगी। जो उसके लिए गरीबों में आटा गीला सरीखी साबित होगी। हथाईबाजों कहना है कुल जमा पाकिस्तान के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। भारत कभी किसी का बुरा नहीं चाहता मगर कोई अपने हाथों से अपने करम फोडऩा चाहें तो इस में हमारा क्या दोष। उसकी नसें कटनी शुरू हो गई। धमनियां कटनी शुरू हो गई। उसके हाथ-पैर कटने शुरू हो गए। घांटकी भी दब जाणी है। जय हिन्द..जय भारत। वंदे मातरम..।

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