जब ही तक मन मांय

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बुद्धि विवेक कुलीनता, जब ही तम मन मांय।
काम-बाण की अगन की, लपट न जब तक आय।।

मनुष्य के मन में बुद्धि विवेक कुलीनता आदि तभी तक मन में रहती है, जब तक कि वह काम वासना की आग की लपट से बचा रहता है। एक राजा बड़ा ही मनचला था। वह प्रजा को और तो कोई दुख नहीं देता था, लेकिन यदि उसकी नजर किसी सुंदर स्त्री पर जा टिकती तो उसे महलों में बुला लेता और अपनी रानी बना लेता। एक दिन वह शिकार खेलने के लिए निकला। जंगल के रास्ते के पास निम्न जाति के लोगों ने डेरा डाल रखा था। गधे और कुत्ते इधर उधर फिर रहे थे। राजा का ठाठ बाट देखकर डेरे के बच्चे और स्त्रियां खडी होकर देखने लगी। उनके डेरे में एक नवयुवती थी जो बहुत ही सुंदर और रूपवती थी। आंखों जैसे हिरनी सी। गोरी सफेद हासिनी सी। उसे देखकर हर किसी को आश्चर्य होता कि भगवान ने उसे निम्न जाति में क्यों जन्म दिया? संयो से राजा की दृष्टि सीधी उसी पर पड़ी। उसे देखते ही उसने घोड़े की लगाम थाम ली और वहीं खड़ा हो गया। डेरे वाले निम्न जाति के लोग डरे कि कोई आफत आई है। राज ने अपने सेवकों को हुक्म दिया कि पता करो कि यह डेरा सिका है? राजा का हुक्म मिलते ही सेवक पता कर आए और कहा कि अन्नदाता, यह तो निम्न जाति के मांगकर खाने वाले लोगों का डेरा है। राजा ने उस दिन कोई शिकार नहीं किया, वापस महल चला गया। महल पहुंचकर अपने सेवकों से कहा कि जाकर जंगल में से निम्न जाति के डेरे के मुखिया को बुलाकर लाओ। हुक्म के साथ घुड़सवार दौडे और डेरे के मुखिया को लाकर दरबार में हाजिर किया। दरबार में राजा ने मुखिया से कहा कि तुम्हारे डेरे में एक सुंदर सी स्त्री है। आज से वह मेरे महल में रानी बनकर रहेगी। इसके बदले तुम्हें तीन गांव मिलेंगे। औरा ना नुकर की तो सबको घानी में पेरवा दूंगा। भला निम्न जाति के लोगों को क्या चाहिए। वे तो राजी राजी उस नवयौवना को लाकर राजा के सामने हाजिर कर दी। राजा ने उसके लिए एक अलग बढिया महल बनवाया। चूंकि वह अन्य रानियों से अधिक  सुंदर थी, इसलिए राजा उसका विशेष ध्यान रखता। दिन निकलते गए राजा का इस नई रानी के प्रति पे्रम बढता ही गया। उसके लिए सुख सुविधाओं के हर प्रकार के इंतजाम किये गए।

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