विनाश की तरफ बढ़ रहा है ये रहस्यमयी गांव 

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ग्रीनलैंड का कानाक कस्बा दुनिया के सबसे उत्तरी छोर पर आबाद जगहों में से एक है। जलवायु परिवर्तन के खिलाफ जंग में ये कस्बा शहीद होने को है। कानाक की आबादी करीब 650 है। यहां के ज्यादातर बाशिंदे बर्फ से भी सर्द माहौल में जीते हैं। यहां दो साल या इससे भी ज्यादा वक्त तक तापमान जीरो डिग्री सेल्सियस से नीचे बना रहता है। आर्कटिक में पडऩे वाला ये इलाका लगातार जमा रहता है। इसकी बुनियाद पर ही यहां इमारतें और दूसरे निर्माण कार्य किए गए हैं। लेकिन, अब धरती का तापमान बढ़ रहा है। तो कानाक की जमीन पिघलने लगी है। अब ये मकानों का बोझ मुश्किल से उठा पा रही है। आगे चल कर शायद ऐसा भी न हो पाए। यानी यहां नए मकान बनाना मुमकिन नहीं रह जाएगा। आर्कटिक इलाके में आबाद दूसरे कस्बों का भी यही हाल है। लेकिन दूसरे कस्बे तो बर्फ के बजाय चट्टानों पर टिके हुए हैं। 1950 के दशक में बसाया गया कानाक कस्बा, मिट्टी, बालू और दलदली जमीन पर बसा है।
 

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