सिर्फ पेट्रोल इंजन के साथ बेची जाएगी रेनॉ की तीसरी जनरेशन डस्टर

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नई दिल्ली
तीसरी जनरेशन डासिआ/रेनॉ डस्टर को भारत में बनाया जाएगा। इस कार को 2023 तक बाज़ार में लाया जाएगा और भारत में यह पहली जनरेशन डस्टर और वैश्विक रूप से दूसरी जनरेशन डस्टर को रिप्लेस करेगी जिसे 2017 के अंत में लॉन्च किया गया था। हम आपको सिर्फ यही जानकारी नहीं दे रहे कि तीसरी जनरेशन डस्टर का उत्पादन भारत में होगा, बल्कि देश में इसके सिर्फ पेट्रोल वेरिएंट्स को ही लॉन्च किया जाएगा। ग्लोबल लेवल पर दूसरी जनरेशन डस्टर के साथ 1.2/1.3 लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन दिए जाते हैं, इसके साथ ही 1.6-लीटर इन-लाइन चार-सिलेंडर वाला पेट्रोल इंजन भी उपलब्ध है। भारत में इस कार का पुराना मॉडल बेचा जाता है और यह 1.5-लीटर HyK इंजन से लैस है जो निसान से लिया गया है। नई कार के साथ मॉडर्न इंजन दिया जाएगा जो छोटा टर्बोचार्ज्ड हो सकता है, यह इंजन ना सिर्फ 2023 ग्लोबल एमिशन स्टैंडर्ड पर खरा उतरता है, बल्कि ऑटो/CVT और मैन्युअल ट्रांसमिशन विकल्पों में भी आता है। रेनॉ ने भारत में डस्टर की नई जनरेशन के सिर्फ पेट्रोल मॉडल को लॉन्च करने का फैसला भारत में अप्रैल 2020 से लागू होने वाले BS6 नॉर्म्स के बाद लिया गया है। रेनॉ ने इसके साथ-साथ अपने वाहनों के इलैक्ट्रिफिकेशन का प्लान भी बनाया है जिसमें हाईब्रिड और फुल ईवी शामिल है। कार एंड बाइक यह पुख़्ता तौर पर हकता है कि इस कार के इलैक्ट्रिफिकेशन के लिए कंपनी यूरोप का सहारा लेगी। और अगर ऐसा नहीं होता तो भारत या ब्राज़ील जैसे बड़े बाज़ार में इनका उत्पादन किया जाएगा। ऐसे में कार का चेसिस, प्लैटफॉर्म और शेप प्लग-इन हाईब्रिड की ज़रूरतों को देखकर तैयार किया जाएगा। कार के इंटीरियर डिज़ाइन में भी बदलाव किया गया है और यह कनेक्टिविटी और इंटरफेस संबंधित तकनीकी से लैस होगी। गौरतलब है कि दूसरी जनरेशन डस्टर को भारत में लॉन्च किया जाने वाला नहीं है। इसकी जगह रेनॉ इंडिया जल्द ही डस्टर को दूसरा बड़ा फेसलिफ्ट देने वाली है जिसे इस साल दिवाली के आस-पास लॉन्च किया जाएगा। कार का प्रारूप वैसा ही है लेकिन इसके चहरे पर नई आकर्षक क्रोम ग्रिल लगाई गई है और टेस्ट मॉडल के हिसाब से कार के पिछले हिस्से में लगे टेललैंप भी अलग तरीके के हैं। बता दें कि डीजल मॉडल की मांग के हिसाब से कंपनी इसे बाज़ार में बेचती रहेगी। यह तय होना बाकी है कि रेनॉ कार के डीजल इंजन को समान 1।5-लीटर ्य9्य स्रष्टद्ब तकनीक दी जाएगी या इसे SCRS - सिलेक्टिव केटेलिटिक रिडक्शन सिस्टम से लैस किया जाएगा जिससे इंधन में से निकलने वाले नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा को कम किया जा सके।

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