भारतीय उपभोक्ता क्रेडिट बाजार को संचालित कर रहे हैं महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक

img

मुंबई
2018 के मध्यबिंदु पर, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे तीन बड़े भारतीय राज्यों में सभी खुदरा ऋण शेष का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा' शामिल था, जबकि ये तीनों राज्य इस अवधि में कुल क्रेडिट आबादी के 32 प्रतिशत हिस्से का और कुल भारतीय आबादी के लगभग 20 प्रतिशत भाग का प्रतिनिधित्व कर रहे थे (स्रोत: ट्रांसयूनियन सीआईबीआईएल डेटाबेस/ जनगणना 2011)। वर्ष 2018 की दूसरी तिमाही से संबंधित ट्रांसयूनियन सीआईबीआईएल इंडस्ट्री इनसाइट्स रिपोर्ट ने बड़े राज्यों में खुदरा उधार प्रवृत्ति का अध्ययन किया और इसके संभावित कारकों में आर्थिक विकास और शहरीकरण की प्रवृत्ति को मुख्य तौर पर उत्तरदायी माना।
जून 2018 तक महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा खुदरा शेष 5,502 अरब रुपये था, जो भारत में सभी खुदरा शेषों का लगभग 20 प्रतिशत है- इसके बाद तमिलनाडु (2,774 बिलियन रुपए) और कर्नाटक (2,749 बिलियन रुपए) के नाम हैं। कुल मिलाकर 10 सबसे बड़े भारतीय राज्य शेष राशि में 21,274 बिलियन रुपए का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसमें कुल शेष राशि का लगभग 76 प्रतिशत हिस्सा शामिल है। साथ ही, 10 सबसे बड़े बैलेंस बाजार 68 प्रतिशत उपभोक्ता क्रेडिट आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। ट्रांसयूनियन सिबिल के वाइस प्रेसीडेंट-रिसर्च एंड कंसल्टिंग योगेंद्र सिंह कहते हैं, यह पूरी तरह स्पष्ट है कि देश के शहरी क्षेत्र बढते खुदरा क्रेडिट उपयोग के मामले में अग्रणी हैं। इन राज्यों में आम तौर पर शहरी इलाके अधिक हैं और अधिकांश आर्थिक विकास भी इन इलाकों में ही हुआ है। नतीजतन, इन क्षेत्रों के उपभोक्ता अपने जीवन को और बेहतर बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के ऋणों का इस्तेमाल कर रहे हैं। कुल मिलाकर ट्रांसयूनियन सीआईबीआईएल ने पाया कि 2017 की दूसरी तिमाही से लेकर 2018 की दूसरी तिमाही के बीच रिटेल लेंडिंग बैलेंसेज में 27 प्रतिशत की बढोतरी हुई है। पिछले साल सभी क्रेडिट प्रोडक्ट्स में व्यक्तिगत ऋण शेष (43 प्रतिशत ऊपर) और क्रेडिट कार्ड बैलेंसेज (42 प्रतिशत ऊपर) में सर्वाधिक वृद्धि हुई है। उसी समय सीमा में इन दोनों क्रेडिट उत्पादों के लिए औसत उधारकर्ता संतुलन में भी 14 प्रतिशत की बढोतरी हुई है।

whatsapp mail