निसान-सेव लाईफ अध्ययन

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  • 90 फीसदी से ज़्यादा लोग रियर सीट बेल्ट न पहन कर अपनी जान को खतरे में डालते हैं
  • लगभग दो तिहाई यानि 64 फीसदी अभिभावकों का मानना है कि भारतीय सडक़ें उनके बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं हैं
  • पिछली सीट पर बैठने वाले 10 में से 9 यानि 91.2 फीसदी बच्चों ने कभी भी रियर सीटबेल्ट का इस्तेमाल नहीं किया है

नई दिल्ली
निसान इण्डिया और सेव लाईफ फाउन्डेशन द्वारा पेश की गई नई शोध रिपोर्ट में चौंका देने वाले आंकड़े सामने आए हैं कि बड़ी संख्या में भारतीय अपनी और अपने बच्चों की सुरक्षा के साथ समझौता कर रहे हैं। आज केन्द्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी द्वारा ‘रियर सीट-बेल्ट यूसेज़ एण्ड चाइल्ड रोड सेफ्टी इन इण्डिया’ विषय पर जारी रिपोर्ट के अनुसार 90 फीसदी से ज़्यादा लोग रियर सीट बेल्ट का इस्तेमाल नहीं कर अपने जीवन को खतरे में डाल रहे हैं। इसकी पुष्टि दिल्ली, मुंबई, जयपुर, बैंगलुरू, कोलकाता और लखनऊ में हुए एक और सर्वेक्षण से हुई है जिसके अनुसार 98 फीसदी उत्तरदाता रियर सीट बेल्ट का इस्तेमाल नहीं करते हैं। हालांकि 70 फीसदी से अधिक लोगों ने सीट बेल्ट की मौजूदगी की पुष्टि की, इसके बावजूद सीट बेल्ट का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या बहुत कम है। अध्ययन में यात्रा के दौरान बच्चों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया गया है, इसके अनुसार दो-तिहाई उत्तरदाताओं का मानना है कि भारतीय सडक़ें बच्चों के लिए असुरक्षित हैं। रिपोर्ट के अनुसार 92.8 फीसदी उत्तरदाता बच्चों के हेलमेट के फायदों के बारें में जानते हैं, इसके बावजूद सिर्फ 20.1 फीसदी उत्तरदाताओं के पास ही अपने बच्चों के लिए चाइल्ड हेलमेट है। हाल ही में सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्रलाय द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार यह और भी प्रासंगिक हो जाता है क्योंकि साल 2017 में 9,408 बच्चों को सडक़ दुर्घटना में अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। यानि भारतीय सडक़ों पर रोजाना लगभग 26 बच्चों की़ मृत्यु हुई। इन परिणामों के साथ रिपोर्ट राष्ट्रीय सडक़ सुरक्षा कानून और मोटर वाहन संशोधन विधेयक पर भी रोशनी डालती है। रिपोर्ट के अनुसार मात्र 27.7 फीसदी उत्तरदाता ही जानते हैं कि भारत में मौजूदा कानूनों के तहत रियर सीट-बेल्ट का इस्तेमाल अनिवार्य है। वहीं 91.4 फीसदी उत्तरदाताओं का मानना है कि भारत में बच्चों के लिए सडक़ सुरक्षा कानूनों को सख्त बनाने की आवश्यकता है।
रिपोर्ट के लॉन्च पर बात करते हुए श्री नितिन गडक़री ने कहा, ‘‘भारत में बुनियादी सुविधाओं का विकास‘‘ तेज़ी से हो रहा है, ऐसे में सडक़ सुरक्षा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। नीतिगत हस्तक्षेपों और जागरुकता के लिए किए जाने वाले प्रयासों के साथ सरकार सडक़ सुरक्षा को बहुत अधिक महत्व दे रही है। मैं इस पहल की सराहना करता हूँ और उम्मीद करता हूँ कि कोरपोरेट भारत और सिविल सोसाइटी एक भारत साथ मिलकर सडक़ सुरक्षा को एक आंदोलन का रूप देंगे। इस रिपोर्ट के लॉन्च पर बात करते हुए निसान इण्डिया के प्रेज़ीडेन्ट थॉमस क्वेहल ने कहा, ‘‘जहां एक ओर भारत में सडक़ सुरक्षा के लिए कई पहलें की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर रियर सीट बेल्ट के इस्तेमाल की पूरी तरह से अनदेखी की जा रही है। निसान में हम इस पहल के माध्यम से लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं। हम रियर सीट बेल्ट के इस्तेमाल के बारे में लोगों को जागरुक बनाना चाहते हैं। सेव लाईफ फाउन्डेशन और शार्प के साथ हमारी सामरिक साझेदारी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अभियान की पहली प्रावस्था के तहत हम 12 शहरों के 240 स्कूलों में 200000 से अधिक बच्चों तक पहुंचेंगे और उन्हें रियर सीट बेल्ट के इस्तेमाल और सडक़ सुरक्षा के बारे में जागरुक बनाने का प्रयास करेंगे। राष्ट्रीय अध्ययन पर बात करते हुऐं पीयूष तिवारी, संस्थापक एवं सीईओं सेव लाईफ  फाउन्डेशन ने कहा, भारत में पहली बार यह रिपोर्ट हमारी सडक़ों पर बाल सुरक्षा के महत्वपूर्ण मुद्दे को रोशनी में लेकर आई है। रिपोर्ट में रियर सीट बेल्ट के इस्तेमाल के बारे में लोगों की सोच और उम्मीदों पर भी रोशनी डाली गई है। सडक़ों पर बड़ी संख्या में होने वाली जानलेवा दुर्घटनाओं की अनदेखी नहीं की जा सकती। समय आ गया है कि चाइल्ट हेलमेट, स्कूल ज़ोन में सुरक्षा, चाइल्ड सीट, स्कूली बसों एवं वैन के चालकों के लिए विशेष प्रशिक्षण जैसे प्रावधानों पर विचार किया जाए और देश भर में व्यस्कों को इन मुद्दों के बारे में जागरुक बनाया जाए। हमें उम्मीद है कि सरकार राष्ट्रीय स्तर पर लोगों की मानसिकता बदलने में मदद करेगी। ‘रियर सीट-बेल्ट यूसेज़ एण्ड चाइल्ड रोड सेफ्टी इन इण्डिया’ अध्ययन का संचालन शोध फर्म एमडीआरए द्वारा निसान इण्डिया और सेव लाईफ  फाउन्डेशन के लिए किया गया। इसमें भारत के 11 शहरों में 6306 लोगों से प्रत्यक्ष साक्षात्कार लिए गए, 100 गहन विशेषज्ञ साक्षात्कार, दो फोकस्ड ग्रुप चर्चाएं तथा ऑन-साईट प्रेक्षण हुए, जिसमें सीबीसीएस स्कूल बसों द्वारा नियमों के पालन एवं रियर सीट बेल्ट के इस्तेमाल पर जानकारी जुटाई गई।

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