बीएसई ने ग्वार सीड और ग्वार गम में कमोडिटी डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग शुरू की

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जयपुर
एशिया के सबसे पुराने एक्सचेंज और अब 6 माइक्रोसेकंड्स की रफ्तार वाले दुनिया के सबसे तेज एक्सचेंज, बीएसई ने आज 10 मीट्रिक टन के लॉट आकार में ग्वार सीड और ग्वार गम में कमोडिटी डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग शुरू की। हाल ही में, बीएसई ने एग्रिकल्चरल कंप्लेक्स में कमोडिटी डेरिवेटिव्स के वृद्धि एवं विकास हेतु भारत के विभिन्न प्रीमियर कृषि संगठनों एवं वेयरहाउस सेवा प्रदाताओं के साथ करार किया था। बीएसई ने लंदन मेटल एक्सचेंज के साथ लाइसेंसिंग करार एवं बेस मेटल कंट्रैक्ट्स के लिए बॉम्बे मेटल एक्सचेंज के साथ जुड़ने के अलावा कृषि कमोडिटीज को लॉन्च करने के लिए राजकोट कमोडिटी एक्सचेंज, फेडरेशन ऑफ इंडियन स्पाइस स्टेकहोल्डर्स, सॉयबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया एवं कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के साथ करार किया था। 
बीएसई के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, श्री आशीष कुमार चौहान ने कहा, ‘‘कमोडिटी डेरिवेटिव्स को 1 अक्टूबर 2018 को एक खण्ड के रूप में बीएसई पर लॉन्च किया गया, जिसके साथ ही भारत का पहला यूनिवर्सल एक्सचेंज बन गया। शुरू में, ट्रेडिंग के लिए सोने और चांदी के कंट्रैक्ट्स लॉन्च किये गये, जिसके बाद भारत का पहला डिलिवरेबल कॉपर कंट्रैक्ट एवं ओमान क्रुड आयॅल कंट्रैक्ट लॉन्च किया गया। हमारा दीर्घकालिक उद्देश्य विभिन्न कृषिगत/गैर-कृषिगत कमोडिटीज को भी लॉन्च करने का है। भारत का कमोडिटी बाजार अभी आरंभिक अवस्था में है और हमें विश्वास है कि इसके विकास के लिए अपार संभावनाएं मौजूद हैं, जो सभी भारतीय शेयरधारकों को नवीनतम तकनीक एवं जोखिम प्रबंधन ढांचा में उपयोग कर प्रभावी रिस्क हेजिंग इंस्ट्रुमेंट्स प्रदान करने हेतु नये-नये कमोडिटीज में विविधीकरण के जरिए हो सकता है। बीएसई की भारत में सबसे अधिक पहुंच है और बोर्स पर 4.1 करोड़ निवेशक पंजीकृत हैं। हम किफायती, सुविधाजनक एवं सर्वाधिक अनुशासित ढांचा उपलब्ध कराकर पहुंच बढ़ाने और अधिक बाजार प्रतिभागियों को आकर्षित करने हेतु सतत प्रयत्नशील हैं।

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