पश्चिम बंगाल में सरकारी तंत्र शारदा घोटाले की जांच में खड़ी कर रहा है बाधा : सीबीआई

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कोलकाता
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने आरोप लगाया है कि करोड़ों रुपये के शारदा चिटफंड घोटाले की जांच पश्चिम बंगाल में  प्रतिकूल सरकारी मशीनरी की वजह से बुरी तरह प्रभावित हुई है और इसी कारण अंतिम आरोप पत्र दाखिल करने में भी देरी हो रही है। देरी के कारणों पर सफाई देते हुए सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई-भाषा से कहा, 'राज्य सरकार सीबीआई के खिलाफ है। शारदा घोटाले के मामले में सरकारी मशीनरी ने सभी सबूतों को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि इसलिए, हमें अंतिम आरोप पत्र दायर करने में देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा सीबीआई को छापे मारने और जांच करने में 'सामान्य सहमति' वापस लेने का निर्णय लेने के बाद इस केंद्रीय जांच एजेंसी की बैंकिंग प्रतिभूति धोखाधड़ी शाखा, विशेष अपराध शाखा और आर्थिक अपराध शाखा निष्क्रय हो गयी। अधिकारी ने कहा कि राज्य में केवल आर्थिक अपराध ढ्ढङ्क (चिटफंड जांच शाखा) ही काम कर रही है। रोजवैली और शारदा घोटालों में अंतिम आरोप पत्र दायर करने की समय-सीमा के संबंध में उन्होंने कहा कि ऐसी कोई समय सीमा नहीं है। रोज वैली चिटफंड घोटाले में 25 जनवरी को हुई मशहूर फिल्म निर्माता श्रीकांत मोहता की गिरफ्तारी का हवाला देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि एक थाने के अधिकारी उस दिन सीबीआई के जांच अधिकारियों को धमकी देने मोहता के कार्यालय गये थे और उन्होंने सीबीआई टीम से पूछा था कि वे यहां क्यों आये हैं। अधिकारी ने कहा कि थाने के उन अधिकारियों के वहां जाने और सीबीआई को अपना काम करने से रोकने का कोई तुक नहीं था। सीबीआई अधिकारियों ने 25 जनवरी को दक्षिण कोलकाता के एक शॉपिंग मॉल में मोहता से उनके कार्यालय में ही पूछताछ की थी और बाद वह उन्हें आगे की पूछताछ के लिए साल्ट लेक में सीजीओ परिसर में सीबीआई कार्यालय ले गये थे। सीबीआई कार्यालय में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। पश्चिम बंगाल के सत्तारुढ़ दल तृणमूल कांग्रेस के करीबी समझे जाने वाले मोहता ने रोज वैली को कथित रुप से 25 करोड़ रुपये का चूना लगाया। सीबीआई करोड़ों रुपये के सारदा और रोजवैली घोटालों की जांच कर रही है। प्रवर्तन निदेशालय भी रोज वैली घोटाले की जांच कर रहा है।

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