टाटा पावर का 90 दिन का ‘वाटलॉस चैलेंज’

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ऊर्जा संरक्षण के लिये #ReflexGeneration की प्रतिबद्धता को दिया बल

राष्ट्रीय
भारत की सबसे बड़ी एकीकृत विद्युत कंपनी टाटा पावर ने अपने विभिन्न ऊर्जा संरक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से हरित जीवन को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। कंपनी तीन महीने चलने वाली एक प्रतियोगिता ‘वाटलॉस चैलेंज’ के लॉन्च के साथ ‘हरित होने’ की प्रतिबद्धता प्रदर्शित करना चाहती है, इसमें सबसे अधिक ऊर्जा बचाने वाले उपभोक्ताओं को पुरस्कृत किया जाएगा। इस प्रतियोगिता को अब तक 812 से अधिक प्रविष्टियाँ मिल चुकी हैं, जिससे भारत की 'रिफ्लेक्स जनरेशन’ की बदलती सोच स्पष्ट है। यह उपभोक्ता विश्वि पर्यावरण दिवस या अर्थ डे जैसे किसी एक खास दिन का उत्सव मनाकर पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को सीमित नहीं करते। अधिक पर्यावरण-हितैषी बनने के लिये वह छोटे, लेकिन स्थायी कदम नियमित आधार पर बढ़ाते हैं। ‘वाटलॉस चैलेंज’ यह दर्शाने का प्रयास है कि आज संरक्षण की दिशा में बढ़ाया गया एक छोटा कदम कल के लिये कैसे लाभप्रद हो सकता है। इस कैम्पेन पर टिप्पणी करते हुए टाटा पावर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक श्री प्रवीर सिन्हा ने कहा, ‘‘हम डिजिटल मंचों पर वाटलॉस चैलेंज की शुरूआत कर चुके हैं और भारत की ‘#ReflexGeneration’ की छोटी-छोटी गतिविधियों को भी देख रहे हैं। इस प्रतियोगिता के जरिये हम ‘‘कम ज्यादा है’’ के दर्शन को बल देना चाहते हैं और उन समुदायों तथा समूहों को एक करना चाहते हैं, जो घर और ऑफिस में अपनी दिनचर्या से पर्यावरण के प्रति जागृति को परिभाषित करते हैं।

भारत की ‘रिफ्लेडक्सै जनरेशन’
पर्यावरण पर विचार करने का आइडिया वचनबद्ध लोगों द्वारा पूर्व-नियोजित, प्रभावशाली, बेहद सार्वजनिक, सामूहिक कार्यों, जैसे मार्चेज, धरना, याचिकाओं से सामने आया है – यह व्यक्तिगत पसंद और हर दिन लिए जाने वाले निर्णयों पर आधारित लोक आंदोलन की दिशा में अग्रसर है। यह ‘सूक्ष्म-सक्रियतावाद’ कम प्रभावी नहीं है, यह उन समुदायों और समूहों को एकजुट करता है, जो घर और ऑफिस में अपनी दैनिक चर्या से पर्यावरण के प्रति जागृति को परिभाषित करते हैं। ऐसे लोगों के लिये पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना स्वाभाविक बन गया है; यह ऐसा रिफ्ले क्सस है जो उनके द्वारा लिए जाने वाले निर्णयों को परिभाषित करता है। भारत की ‘रिफ्लेपक्सत जनरेशन’ का प्रभाव कार्यस्थल पर प्रत्यक्ष है; आज संभावित कर्मचारी अपने निर्णय का आधार नियोक्ता की पर्यावरण सम्बंधी उपलब्धियों को बना रहे हैं। डेलोइट के वार्षिक जनरेशन वाई सर्वे के अनुसार 76 प्रतिशत भारतीय युवाओं ने ऐसे नियोक्ताओं को चुनने का दावा किया, जिनके मूल्य उनके समान हैं; एक अन्य शोध द्वारा समर्थित परिणाम बताता है कि युवा ऐसे नियोक्ता पसंद करते हैं, जो कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरण और स्थायित्व के लिये ‘उचित प्रतिबद्धता’ दर्शाते हैं। लोगों द्वारा पर्यावरण की सुरक्षा पर सचेत होने का एक संकेत यह है कि वह छोटे पैमाने पर, लेकिन स्थायी रूप से हरित उत्पाद खरीद रहे हैं। डेलोइट के एक अध्ययन में 1 लाख रू. या इससे अधिक मासिक वेतन वाले परिवारों के 38 प्रतिशत लोगों ने पर्यावरण-हितैषी उत्पादों के लिये 10 प्रतिशत अधिक राशि या अधिक प्रीमियम का भुगतान करने की इच्छा जाहिर की। अन्य शोध बताते हैं कि 95 प्रतिशत लोग ऐसे ब्राण्ड्स चाहते हैं, जो जिम्मेदार व्यवहार का प्रदर्शन करते हैं। अंततः आज के पर्यावरण संरक्षकों ने ऐसी जीवनशैली अपनाई है, जो उनके दैनिक जीवन में पर्यावरण की चिंता के दर्शन पर आधारित है। दैनिक उपयोग के लिये इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति रूचि एक अन्य उदाहरण है कि भारत के युवा पर्यावरण के प्रति अधिक सचेत हो रहे हैं। विश्वभर में 81 प्रतिशत उपभोक्ता सामाजिक, पर्यावरणीय समस्याओं को सम्बोधित करने के लिये ‘व्यक्तिगत बलिदान’ का दावा करते हैं। यह भारत की ‘रिफ्लेरक्स जनरेशन’ के हृदय में ‘सूक्ष्म-सक्रियतावाद’ का प्रतिबिंब दर्शाता है। 

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