अपने घर में निवेश करने का बेहतर विकल्प

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जयपुर
दीपावली और आगामी उत्सव का मौसम बुद्धिमतापूर्ण निवेश का निर्णय लेने का अवसर है। पारंपरिक निवेश विकल्प, जैसे कि धनतेरस पर सोना खरीदने की परम्परा लागत कारकों के कारण अपनी चमक खो रहा है, अपने घर को खरीदने में अपना पैसा लगाने से बेहतर निवेश की भावना मिलती है। इस बारे में रिलायंस होम फायनेंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रवीन्द्र सुधाकर कहते हैं खरीदारों को नए प्रोजेक्ट लॉन्च, लोन और ब्याज दर छूट और अन्य उत्सव प्रस्तावों पर नजर रखना चाहिए और सरकारी सब्सिडी और छूट का लाभ उठाना चाहिए ताकि वे इस दिवाली पर अपने घरों में निवेश कर सकें। रियल स्टेट डेवलपर्स आमतौर पर इन त्योहरी सीजन में नए प्रोजेक्ट्स लांच करते हैं। वर्तमान में किफायती आवासों (अफोर्डेबल हाउसिंग) पर ध्यान केन्द्रित है, दिवाली सीजन के दौरान इस श्रेणी में कई विकल्प उपलब्ध होने की संभावना है जिनमें घर 25 लाख रुपये से कम लागत वाले भी हैं। ऐसा अनुमान है कि आने वाले तीन वर्षो के दौरान अनुमानित 50,000 नई आवासीय सम्पत्ति इकाई विकसित होंगी और भारत में पांच में से एक आवास की लागत 25 लाख रुपए से कम रहेगी। इसके साथ ही रिलायंस होम फायनेंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रवीन्द्र सुधाकर ने कहा कि उत्सव का सीजन हमेशा एक खरीदार का बाजार होता है, क्योंकि छुट्टियों के कारण कई खरीदार बाजार से बाहर हैं और इसलिए वे डेवलपर या विक्रेता के साथ बेहतर सौदा करने में सक्षम हो सकते हैं। उनका कहना था यदि आप इस त्यौहार के मौसम में घर खरीदना चाहते हैं, तो आपको निश्चित रूप से उपलब्ध आकर्षक ऑफर का लाभ उठाने के लिए कदम उठाना चाहिए, लेकिन यह आपके होमवर्क करने और सर्वोत्तम संभव सौदा सुरक्षित करने के लिए समझदारी होगा। ऋण कंपनियों और संपत्ति डेवलपर्स द्वारा विभिन्न उत्सव प्रस्तावों पर नजर रखने के अलावा, उन्हें भारतीय संपत्ति बाजार में मूल्य स्थिरता के वर्तमान चरण का भी लाभ उठाना चाहिए। भारत के सभी शीर्ष 8 संपत्ति बाजार (पुणे को छोड़कर) ने वार्षिक आधार पर विकास दिखाया है, जो रियल एस्टेट में निवेश के लिए एक अ'छा संकेत है। चूंकि सरकार किफायती आवास में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करने के वास्ते निवेश के लिए विभिन्न सब्सिडी भी प्रदान करती है, इसलिए कोई भी इस श्रेणी के अंतर्गत आने वाली परियोजनाओं में अपने घर खरीदने पर विचार कर सकता है। प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत, सरकार 18 लाख रुपए तक की सालाना पारिवारिक आय पर 2.3 लाख रुपये की अग्रिम सब्सिडी प्रदान करती है। रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) अधिनियम के कार्यान्वयन के साथ रियल एस्टेट परियोजनाओं में निवेश अब और भी अधिक सुरक्षित बन गया है। डेवलपर्स को अब रेरा अधिनियम के तहत निर्धारित सख्त मानकों का पालन करना आवश्यक कर दिया गया है, जिसने एक निर्माता के ट्रस्ट फैक्टर और वास्तविकता को बढ़ावा दिया है।

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