अब रिटायरमेंट के बाद एनपीएस एक बेहतर निवेश योजना

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नई दिल्ली
नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) से रिटायरमेंट के बाद होने वाली पूरी निकासी को आखिरकार टैक्स फ्री बना दिया गया है। यह बात हालांकि पहले से ही स्पष्ट थी कि एक-न-एक दिन ऐसा निश्चित रूप से किया जाएगा और हर साल आम बजट से पहले कुछ लोग ऐसा कहते भी रहे थे। खुद मैं 2009 के बाद से हर साल ऐसा लिखता रहा हूं। कुछ साल पहले वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ ब्यूरोक्रैट ने भी आम बजट से पहले कहा था कि तार्किक आधार पर ऐसा किया जाना उचित है। हालांकि अभी तक ऐसा किया नहीं जा सका था, जो अब आखिरकार हो गया। रिटायरमेंट के बाद होने वाली संपूर्ण निकासी को टैक्स फ्री बनाने से आखिरकार एनपीएस भी कराधान के लिहाज से ईपीएफ्र और पीपीएफ्र के समान हो गया। प्रोविडेंट फ्रंड स्कीम्स में भी जमाओं पर टैक्स नहीं लगता है (निर्धारित सीमा तक), रिटर्न पर टैक्स नहीं लगता और निकासी भी टैक्स फ्री है। एनपीएस में यह तीसरा चरण अब तक टैक्स फ्री नहीं था। बल्कि सच्चाई तो यह है कि इसमें अब तक खंडित कराधान की संरचना थी, जो किसी भी अन्य प्रकार की जमा योजनाओं की कराधान व्यवस्था के मुकाबले अधिक जटिल थी। एनपीएस में कुल फ्रंड के 40 फ्रीसद का एन्युटी (पेंशन) खरीदने में अनिवार्य तौर पर उपयोग करने का प्रावधान है और यह अंश टैक्स फ्री है। शेष राशि की निकासी की जा सकती है और इस हिस्से पर टैक्स लगता था। अब एनपीएस का पूरा का पूरा फ्रंड टैक्स फ्री कर दिया गया है। एनपीएस जहां 2004 के बाद सेवा से जुडऩे वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य है, वहीं यह निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी उपलब्ध है। साथ ही यह स्वरोजगार करने वाले लोगों के लिए भी उपलब्ध है। एनपीएस को टैक्स फ्री बना देने से देश में उपलब्ध सेवानिवृत्ति विकल्पों में एक बुनियादी और महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। अभी यह इसलिए भी और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है कि इक्विटी फ्रंड से होने वाले लांग टर्म रिटर्न को टैक्सेबल बना दिया गया है। अब एक आम आदमी एनपीएस में हाई इक्विटी ऑप्शन चुन सकता है और 60 साल तक बचत कर सकता है। उस समय जाकर पूरी की पूरी राशि की निकासी टैक्स फ्री हो जाएगी, हालांकि 40 फ्रीसद राशि को एन्युटी में निवेश करना अनिवार्य है। आप म्यूचुअल फ्रंड में भी ऐसा कर सकते हैं, पर मुझे लगता है कि एनपीएस को टैक्स फ्री बनाए जाने के बाद की स्थिति में एनपीएस तुलनात्मक रूप से एक बेहतर विकल्प बन गया है। म्यूचुअल फ्रंड की तुलना में एनपीएस का खर्च काफ्री कम होता है। लंबी अवधि में देखा जाए, तो कंपाउंडिंग के प्रभाव के कारण कम खर्च का लाभ बढ़कर काफ्री अधिक हो जाता है। इसमें यदि नई शून्य कर वाली व्यवस्था के लाभ को भी जोड़ दिया जाए, तो म्यूचुअल फ्रंड की तुलना में एनपीएस एक बेहतर रिटायरमेंट सेविंग ऑप्शन हो जाता है।

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