ऋण शोधन एवं दिवाला संहिता से कर्ज वसूली प्रक्रिया में आई तेजी: फिक्की सर्वे

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नयी दिल्ली
ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवाला संहिता (आईबीसी) से कर्ज वसूली प्रक्रिया तेज हुई है और बैंकों की स्थिति मजबूत हुई है। उद्योग मंडल फिक्की के एक सर्वे में यह कहा गया है। सर्वे में भाग लेने वाले बैंकों ने बताया कि आईबीसी ने प्रवर्तकों को कर्ज लौटाने में असफल होने के शुरूआती चरण में ही मामले का निपटारा करने के लिये प्रोत्साहित किया है। फिक्की-आईबीए के सातवें दौर के इस सर्वे के अनुसार समाधान प्रक्रिया में और सुधार लाने के लिये बैंक अधिकारियों ने न्यायपालिका की क्षमता बढ़ाने तथा स्थानीय स्तर पर सरकारी अधिकारियों को अधिक अधिकार दिये जाने का सुझाव दिया। सर्वे में शामिल 22 बैंक अधिकारियों ने कहा है कि स्थगन अवधि को 270 दिन से आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इसके अनुसार उन्होंने स्थगन अवधि सहित उन कंपनियों के लिये कर्ज की मियाद बढ़ाने का सुझाव दिया जिनका कारोबार व्यावहारिक है लेकिन वर्तमान में उनके लेनदेन खातों के खिंचाव में होने की वजह से उनपर दबाव बना हुआ है। इसमें कहा गया है, आईबीसी से दबाव वाली संपत्ति के समाधान में सफलता मिली है। हालांकि कानून अभी निरंतर विकसित हो रहा है। सर्वे में शामिल 67 प्रतिशत प्रतिभागियों ने मानकों को कड़ा करने की जानकारी दी है। जबकि पिछले दौर के सर्वे में यह 28 प्रतिशत था। इसमें कहा गया है कि जीडीपी वृद्धि के तेजी के रास्ते पर आने के बावजूद बैंक कर्ज देने में अभी भी चुनौती का सामना कर रहे हैं। उधर, खुदरा मुद्रास्फीति को लेकर जोखिम बरकरार है। सरकारी खर्च बढ़ने के साथ ही कच्चे तेल के दाम बढ़ने से यह स्थिति बन रही है।

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