भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर डॉ. उर्जित पटेल ने लॉन्च किया एनपीसीआई का यूपीआई 2.0

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मुंबई
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर डॉ उर्जित पटेल ने आज नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) द्वारा विकसित किए गए युनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस 2.0 को लॉन्च किया। लॉन्चिंग समारोह की अध्यक्षता करते हुए डॉ पटेल ने रेखांकित किया कि लॉन्च रिजर्व बैंक द्वारा अपनाए गए कैलब्रेटेड दृष्टिकोण का परिणाम रहा है - प्रारंभिक वर्षों में डेवलपर के रूप में और बाद के वर्षों में उत्प्रेरक और सुविधाकर्ता के रूप में। उन्होंने बताया कि भारत में भुगतान प्रणाली की तुलना दुनिया की किसी भी भुगतान प्रणाली से की जा सकती है और हमारी भुगतान प्रणाली ने कुछ ऐसे मानक और स्वस्थ परंपराएं कायम की हैं, जिनका दूसरे लोग अनुकरण कर सकते हैं। डॉ पटेल ने साइबर सुरक्षा को पर्याप्त महत्व देने की जरूरत को भी रेखांकित किया और कहा कि इस क्षेत्र में सभी वर्गों को मिलजुलकर प्रयास करने होंगे और इस दिशा में लागत को कभी भी एक अवरोधक कारक नहीं बनाया जाना चाहिए।
नंदन नीलेकणी, सलाहकार - इनोवेशन, एनपीसीआई और गैर-कार्यकारी अध्यक्ष, इंफोसिस ने सेक्शन 8 कंपनी के रूप में एनपीसीआई की स्थापना में रिजर्व बैंक की भूमिका की चर्चा की और कहा कि इस कदम ने देश के भुगतान परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निभाई गई असाधारण भूमिका का खुलासा किया और डॉ पटेल और उनकी टीम को कैलब्रेटेड रेग्युलेशन और नवाचार को बढ़ावा देने वाले दृष्टिकोण के लिए धन्यवाद दिया, जिसके परिणामस्वरूप आज भारत में अनेक भुगतान प्रणालियों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो अत्याधुनिक तो हैं ही, और लागत प्रभावी भी हैं। विमुद्रीकरण के बाद के दौर में यूपीआई ने काफी वृद्धि की है और खुदरा भुगतान प्रणाली के लिए इसने एक उत्प्रेरक की भूमिका निभाई है। जिसके बाद कई बैंकों ने यूपीआई से मिलती-जुलती भुगतान प्रणाली विकसित की है और फिनटेक इंडस्ट्री तथा आईटी कंपनियों ने भी ऐसे ही प्रोडक्ट तैयार किए और उपयोगकर्ताओं की सुविधा और आसानी के लिए अभिनव समाधान प्रस्तुत किए। आज यह प्रणाली दुनिया के बेहतरीन सिस्टम में से एक है और अब कुछ विकसित देश भी इसे अपनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि यूपीआई संस्करण 2.0 ने बैंकों द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले अभिनव भुगतान समाधानों के लिए एक नया मार्ग निर्धारित किया है और चूंकि सिस्टम्स को मानकीकृत किया गया था और ये ओपन सोर्स पर आधारित थे, इस लिहाज से वे दक्ष और कुशल भी थे। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के चेयरमैन रजनीश कुमार ने बैंकों द्वारा तैयार किए गए और यूपीआई जैसी आम सुविधाओं से मिलते-जुलते भुगतान सिस्टम की जानकारी दी और कहा कि इन प्रयासों से बैंकिंग सुविधाओं से जुडे लोगों को बेहद आसानी हो गई है। यूपीआई 2.0 में इनवॉइस इन इनबॉक्स, हस्ताक्षरित इंटेंट/क्यूआर, यूपीआई मेण्डेट विद ब्लॉकिंग फंड और ओवरड्राफ्ट अकाउंट के लिए यूपीआई जैसी महत्वपूर्ण खूबियां हैं, जो सभी एक सुरक्षित और निरापद तरीके से काम कर रहे हैं।

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