वैश्विक स्तर पर पैसिव निवेश की काफी स्वीकृति

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जयपुर
भारत के ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स) की प्रबंधनाधीन परिसंपत्ति (एयूएम) में पिछले 4 वर्षों में असाधारण वृद्धि देखने को मिली है। दिसंबर 2013 से दिसंबर 2017 तक कुल प्रबंधनाधीन परिसंपत्ति 8,010 करोड़ रूपये से बढ़कर 77,897 करोड़ रूपये पहुंच गई है और इसमें 76.6 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई। इसी अवधि में, अलग-अलग परिसंपत्ति वर्गों इक्विटी ईटीएफ की एयूएम 95 गुणा बढ़कर 745 करोड़ रूपये से 71,109 करोड़ रूपये पर आ गई तथा गोल्ड कमोडिटी आधारित ईटीएफ की एयूएम में गिरावट देखने को मिली। इक्विटी ईटीएफ की एयूएम में उल्लेखनीय वृद्धि होने के पीछे जिन संचालक घटकों का हाथ हैं उनमें भारत सरकार द्वारा ईटीएफ के जरिये विनिवेश शामिल है। भारत 22 ईटीएफ एसएंडपी बीएसई भारत 22 इंडेक्स पर नजर रखता है और यह सबसे हालिया उदाहरण है। वर्ष 2015 में, ईपीएफओ (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) ने ईटीएफ में विनिवेश आरंभ करने का फैसला किया जोकि एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स जैसे सूचकांकों को ट्रैक करता है, यह ईटीएफ की परिसंपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि का एक और प्रमुख संचालक घटक है। वैश्विक स्तर पर, पैसिव निवेश को भी काफी स्वीकृति मिली क्योंकि यह निवेशकों को कम लागत और पारदर्शिता एवं वस्तुनिष्ठ निवेश टूल प्रदान करती है। पैसिव निवेश का उद्देश्य इंडेक्स द्वारा कमाये गये रिटर्न को दोहराना है। ग्लोबल एसपीआइवीए (एसएंडपी इंडाइसेस बनाम ऐक्टिव स्कीम्स) स्कोर्ड कार्ड में पता चलता है कि भारत के साथ-साथ दुनिया भर में बाजार को पीछे छोडऩा लगातार काफी मुश्किल होता जा रहा है। यह समझना जरूरी है कि इक्विटी बाजार जीरो सम का गेम है; एक निवेशक अल्फा अर्जित कर सकता है, यदि दूसरा निवेश निगेटिव अल्फा प्राप्त कर रहा है। साथ ही निवेशक पैसिव निवेश से अल्फा कॉस्ट प्राप्त करने की कोशिश करता है। भारत में, सेबी द्वारा किये गये हालिया विनामकीय बदलाव जैसे म्यूचुअल फंड वर्गीकरण और टोटल रिटर्न इंडेक्स का इस्तेमाल कर प्रदर्शन तुलना ऐक्टिव फंड मैनेजर के काम को और अधिक कठिन बना सकते हैं। हाल के समय में फैक्टर इन्वेस्टिंग और ईएसजी (एनवॉयरमेंट, सोशल एंड गवर्नेंस) जैसी नई थीम्स को समूचे विश्व और भारत में काफी लोकप्रियता मिल रही है। एक फैक्टर वह एलीमेंट है जोकि किसी पोर्टफोलियो के रिस्क/रिटर्न गुण के स्रोत की व्याख्या करता है। व्यापक रूप से पहचाने जाने वाले फैक्टर्स में आकार, लाभांश, अनिश्चितता, गति, गुणवत्ता और मूल्य शामिल हैं। एसएंडपी बीएसई एन्हैंस्ड वैल्यू, एसएंडपी बीएसई डिविडेंड यील्ड, एसएंडपी बीएसई लो वोलाटिलिटी, एसएंडपी बीएसई मोमेंटम, एसएंडपी बीएसई क्वालिटी ऐसे सूचकांक हैं जिन्हें अलग-अलग फैक्टर्स के प्रदर्शन को मापने के लिए तैयार किया गया है। इसी तरह, जलवायु परिवर्तन, सामाजिक तनाव, और कमजोर सुशासन के जोखिम भी बढ़ रहे हैं, ऐसे में पर्यावरणीय, सामाजिक और सुशासन के पहलुओं का विधिपूर्वक विश्लेषण किया जाता है और इन्हें निवेश विश्लेषण में भी फैक्टर किया जाता है। एसएंडपी बीएसई 100 ईएसजी इंडेक्स इस तरह की थीम का बहुत अच्छा उदाहरण है जोकि कंपनियों के प्रदर्शन को मापता है और ईएसजी मानदंडों पर तुलनात्मक रूप से अधिक अंक देता है।

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