महिंद्रा का इगतपुरी संयंत्र भारत का शून्य कार्बन उत्सर्जन वाला पहला संयंत्र

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इगतपुरी
महिंद्रा समूह ने वर्ष 2040 तक कार्बन उत्सर्जन शून्य करने के अपने संकल्प को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया। महिंद्रा का इगतपुरी निर्माण संयंत्र हाल ही में शून्य कार्बन उत्सर्जन वाला पहला संयंत्र बन गया है। टेस्टिंग, इंस्पेक्शन ऐंड सर्टीफिकेशन (टीआईसी) में दुनिया में अग्रणी, ब्यूरो वेरिटास (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड द्वारा यह प्रमाणित किया गया। श्री विजय कालरा, सीईओ - महिंद्रा व्हीकल मैन्युफैक्चरर्स लिमिटेड और चीफ मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशंस, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा लिमिटेड ने कहा, ‘‘यह महिंद्रा समूह के भीतर पहला ऐसे संयंत्र है, जिसे शून्य कार्बन उत्सर्जन वाले संयंत्र के रूप में प्रमाणित किया गया है। हम ऊर्जा के संतुलित उपयोग, नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग पर तीव्र ध्यान और अपशिष्ट कार्बन के अवशोषण हेतु वृक्षारोपण के जरिए इसे हासिल करने में सक्षम रहे हैं। महिंद्रा ऐंड महिंद्रा दुनिया की पहली ऐसी कंपनी है, जिसने वर्ष 2030 तक अपनी ऊर्जा उत्पादकता को दोगुना करने हेतु प्रतिबद्धता जाहिर की है और क्लाइमेट ग्रुप के ईपी100 प्रोग्राम के लिए हस्ताक्षर किया है। ऊर्जा की कम खपत के जरिए लाइटिंग, ऊर्जा की कम खपत के जरिए हीटिंग, वेंटिलेशन एवं एयर कंडिशनिंग (एचवीएसी), मोटर एवं हीट रिकवरी प्रोजेक्ट्स का उपयोग कर, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा ने निर्धारित समय सीमा से लगभग 12 वर्ष पहले ही अपने ऑटोमोटिव बिजनेस की ऊर्जा उत्पादकता को दोगुना कर लिया है। इस उपलब्धि पर, महिंद्रा समूह के चीफ सस्टेनेबिलिटी ऑफिसर, श्री अनिर्वाण घोष ने बताया, ‘‘कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में अपने द्वारा किये जा रहे प्रयास के जरिए, हम न केवल जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना करने की दिशा में पहल कर रहे हैं, बल्कि नवाचार एवं अधिक महत्वपूर्ण रूप से बिजनेस में टिकाऊपन पर अधिक जोर दे रहे हैं। महिंद्रा ऐसी पहली भारतीय कंपनी भी थी, जिसने प्रति टन उत्सर्जित कार्बन के लिए 10 डॉलर के अपने आंतरिक कार्बन मूल्य की घोषणा की, ताकि शून्य कार्बन उत्सर्जन हासिल करने हेतु किये जा रहे प्रयासों के लिए आवश्यक निवेशों की फंडिंग की जा सके। अंतर्राष्ट्रीय मानकों के आधार पर ध्यानपूर्वक मूल्य तय किया गया था और ऊर्जा दक्षता एवं नवीकरणीय ऊर्जा पर बिजनेस द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने की आवश्यकता के आधार पर मूल्यांकन किया गया। कंपनी को कार्बन सिंक्स तैयार करने में 10 वर्षों से अधिक समय का अनुभव है, जिसकी मदद से इसने इस लक्ष्य को हासिल किया है। महिंद्रा ऐंड महिंद्रा शून्य कार्बन उत्सर्जन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की दिशा में अंतर्राष्ट्रीय अलाभकारी संगठन, एनवायरमेंटल डिफेंस फंड (ईडीएफ) के साथ मिलकर काम करता है। ईडीएफ, कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी लीडरशिप के लिए मानक को और ऊपर उठाने हेतु प्रमुख कंपनियों के साथ मिलकर काम करता है। चूंकि महिंद्रा शून्य कार्बन उत्सर्जन हासिल करने की दिशा में प्रयासरत है, इसलिए यह ईडीएफ और अन्य प्रमुख सहयोगियों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा। महिंद्रा ऐंड महिंद्रा साइंस बेस्ड टार्गेट्स पहल का एक हस्ताक्षरकर्ता भी है, जो ग्लोबल वार्मिंग को 2 डिग्री सेंटीग्रेड के स्तर से काफी नीचे रोकने की पेरिस संधि के लक्ष्य के अनुरूप उत्सर्जन कम करने हेतु कंपनियों को एक स्पष्ट मार्ग बतलाता है। ये सभी संकल्प कंपनियों को शून्य कार्बन उत्सर्जन की दिशा में बढ़ने में सहायक हैं। 
                                                                                                                                                                                  महिन्द्रा के विषय में 
महिन्द्रा समूह 20.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर वाला कंपनियों का संघ है, जो नये-नये मोबिलिटी समाधानों के जरिए और ग्रामीण समृद्धि, शहरी रहन-सहन को बढ़ाते हुए, नये व्यवसायों को प्रोत्साहन देकर और समुदायों की सहायता के जरिए लोगों को राइज अर्थात़ उत्थान करने में सक्षम बनाता है। इसका ट्रैक्टर, उपयोगिता वाहन, सूचना प्रौद्योगिकी और वैकेशन ओनरशिप में अग्रणी स्थान है और यह वॉल्युम की दृष्टि से दुनिया की सबसे बड़ी ट्रैक्टर कंपनी है। कृषि-व्यवसाय, एयरोस्पेस, कल-पुर्जे, परामर्श सेवाओं, प्रतिरक्षा, ऊर्जा, औद्योगिक सेवाओं, लॉजिस्टिक्स, जमीन-जायदाद, खुदरा, इस्पात और दोपहिये उद्योगों में महिन्द्रा की महत्वपूर्ण मौजूदगी है। इसका मुख्यालय भारत में है। महिन्द्रा में 100 से अधिक देशों में 2,40,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं।

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