सुप्रीम कोर्ट ने एनसीएलएटी का आदेश खारिज किया

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आर्सेलरमित्तल के लिए अधिग्रहण का रास्ता साफ

नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने दिवालिया एस्सार स्टील के रेजोल्यूशन मामले में एनसीएलएटी का फैसला शुक्रवार को खारिज कर दिया। नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल ने 5 जुलाई को आदेश दिया था कि एस्सार स्टील के ऑपरेशनल क्रेडिटर्स को फाइनेंशियल क्रेडिटर्स के बराबर मानते हुए भुगतान किया जाए। एस्सार स्टील की कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से स्टील कारोबारी लक्ष्मी मित्तल की कंपनी आर्सेलरमित्तल के लिए एस्सार स्टील के अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया है। यानी स्टील किंग लक्ष्मी मित्तल के लिए भारत में कारोबार का जरिया मिल गया। भारतीय मूल के मित्तल लंदन में रहते हैं, लेकिन भारत की नागरिकता नहीं छोड़ी है। दिवालिया प्रक्रिया के तहत एस्सार स्टील को खरीदने के लिए आर्सेलरमित्तल की 42,000 करोड़ रुपए की बोली को एनसीएलएटी ने मंजूरी दी थी, लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट में होने की वजह से अधिग्रहण अटका हुआ था। आर्सेलरमित्तल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि एस्सार स्टील के अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायिक प्राधिकरण रेजोल्यूशन प्लान को दिशा-निर्देशों के साथ लागू करने के लिए कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स को वापस भेज सकती है, लेकिन उसके कमर्शियल फैसलों को नहीं बदल सकती। साथ ही कहा कि ड़ेकमेटी ऑफ क्रेडिटर्स की योजना सभी पक्षों के हितों को देखते हुए संतुलित होना चाहिए। अदालत ने इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) के तहत रेजोल्यूशन के लिए 330 दिन की समयसीमा में भी छूट दे दी। कोर्ट ने कहा कि विशेष मामलों में यह छूट रहेगी। एस्सार स्टील पर 54,547 करोड़ रुपए का कर्ज है। उसके खिलाफ अगस्त 2017 में दिवालिया प्रक्रिया शुरू हुई थी। एस्सार स्टील का मामला उन 12 बड़े एनपीए में से एक है जिनके खिलाफ आरबीआई ने 2017 में दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने की सिफारिश की थी।

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