पिंड में मोटा पाप

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पिंड में मोटा पाप, पंथ बहता बाथां पडै़।

अळगा रहजो आप, मैला मिनखां मोतिया।।

जो कपटी होते हैं उनके अंदर बड़े-बड़े पाप समाये होते हैं। ऐसे लोग राह चलतों से टकराते हैं। इन मलिनता रखने वाले लोगां से तो सदा दूर ही रहना चाहिए। एक किसान के खेत में कैर के पुराने पेड़ खड़े थे। जब बरसात का मौसम आया तो उसने उनको जड़ों समेत उखाड़ दिया। इस प्रकार कोई दस गाड़े कैर की लकड़ी हो गई। उसने सोचा की कैर की इतनी लकड़ी का क्या करेंगे, अत: वह उसे बेचने की सोचने लगा। लड़कों ने मना किया कि घर में जलाने के काम आएगी, लेकिन उसने कहा कि बहुत ज्यादा लकडिय़ां हैं, इसलिए दो चार गाड़े बेचनी ठीक रहेगी। वह एक गाड़े में लकडिय़ां भरकर और बेल जोत कर रवाना हुआ और पास के एक गांव में जा पहुंचा। चौहटे के बीच जाकर उसने गाड़ा रोक दिया। थोड़ी ही देर बाद वहां एक सेठ आया। उसने गाड़े के चारों ओर चक्कर लगाया और उसमें भरी हुई लकडि़ यों को अच्छी तरह देखा। फिर किसान से बोला कि बोल चौधरी, गाड़े का क्या मोल? किसान सीधा सादा और भोला था। उसने कहा कि सेठजी, ईश्वर को ऊपर रखकर आप ही कह दीजिए। इस पर सेठ बोला कि माल तुम्हारा है चौधरी, इसलिए मोल तो तुम्हें ही बताना पड़ेगा। लेकिन बात एक ही कहना, बार बार पलटना मत। तब किसान बोला कि राजा कर्ण की वेला है, अत: एक ही बात कहलवाते हो तो गाड़े का मोल दस रूपये। उसकी बात सुनकर सेठ बोला कि तो ठीक है, जोतबैवलों को और चल मेरे साथ। लेकिन देख, फिर इंकार मत करना। किसान बोला कि इंकार कैसा सेठजी, बाप और बोल तो एक ही होते हैं। जब मैंने मोल बता दिया और आप वह मोल देने को तैयार हो गए तो भला मैं क्यों इंकार करूंगा? किसान ने गाड़ा ले जाकर सेठ के नोहरे में खाली कर दिया। सेठ ने उस दस रूपये रोकड़ पकड़ा दिए। किसान रूपये पोतिये के पल्ले बांधकर गाड़ा लेकर रवाना होने लगा कि सेठ उसके आडे फिरा। बोला कि गाड़ा उधर खोलकर बैलों को खूंटे से बांध दे रे चौधरी। बेचा हुआ गाड़ा बैल लेकर तू रवाना कैसे होने लगा? किसान हक्का बक्का होकर बोला कि गाड़ा और बैल किसने बेचे? मैंने मो सिर्फ लकडिय़ां बेची है। सेठ कहने लगा कि देख चौधरी, बाप और बोला एक हुआ करते हैं। मैंने तुझसे गाड़े का मोल पूछा था और तूने भी गाडे का ही मोल बताया। वह मोल मैंने तुझे दे दिया। इसलिए भला चाहते हो तो चुपचाप रवाना हो जाओ। किसान ने बहुतेरी मिन्नतें की लेकिन सेठ नहीं माना। उसने उसे धक्के देकर वहां से बाहर निकलवा दिया।