किंकर हो हुसियार

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मौत बाज तइमार, प्राण कबूतर ना बचे।
किंकर हो हुसियार, राम नाम री ओट ले।।

मौत रूपी बाज घूम रहा है और देर सवेरे प्राण रूपी कबूतर उसके पंजे में चला ही जाएगा। इसलिए मनुष्य को सजग होकर राम नाम का सहारा लेना चाहिए। अच्छे काम करना चाहिए। (गतांक से आगे) महात्माजी ने उससे कहा कि मैं आपको यह बात नहीं कहना चाहता था,लेकिन आपके विशेष आग्रह ने मुझे कहने पर मजबूर कर दिया, इसलिए मुझे कहनी पड़ी। खैर, आपकी मृत्यु टालनी किसी के हाथ की बात नहीं है। लेकिन आपकी बात का जवाब थोड़ा जल्दी देना तो मेरे हाथ में है। अत आपकी मृत्यु से पहले वह जवाब आपको मिल जाएगा। राजा उदासन मन से किसी प्रकार लडख़ड़ाता हुआ अपने महल को पहुंचा। भोजन के समय थाल परोसा जाकर उसके सामने आया तो एक टुकड़ा भी रोटी का खाने को मन नहीं हुआ। गाना बजाना और आमोद प्रमोद कुछ भी अच्छा नहीं लगा। उसने सब बंद करवा दिए। रानियां और दासियां सभी हैरान। किसी की हिम्मत नहीं पड़ी। आखिर पटरानी ने हिम्मत की और उसने पूछा, लेकिन राजा ने उसको काई जवाब नहीं दिया। बात को टाल दिया। रात हुई तो राजा सो गया लेकिन सारी रात करवटें बदलते हुए बीती न तो सोने पर चैन मिलता और न ही बैठने पर। रात जैसे द्रौपदी के चीर बन गई। ऐसी दुखभरी और डरावनी रात राजा के जीवन में कभी नहीं आई। जैसे तैसे सुबह हुई। राजमहल में मंगल ध्वनि बजने लगी। मृत्यु की घड़ी में राजा को कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था। मृत्यु की घड़ी के पास जानकर राजा को और कुछ भी नहीं सूझ रहा था। थोड़ा सा दिन चढा तो महात्माजी स्वयं राजा के महल में पधारे। उन्होंने राजा से पूछा कि कहिए राजन। रात को सुख शांति से बीती राजा में तो मृत्यु का डर समाया हुआ था। वह कहने लगा कि महात्मन्, कौन सा सुख और कौन सी शांति? जब मृत्यु की घड़ी सामने आ जाती है तो कुछ भी नहीं सूझता है। तब तो केवल मृत्यु ही याद रहती है। महात्माजी तब जोर से हंसे और बोले कि आप निश्चिंत रहें राजन। आपकी मृत्यु अभी बहुत दूर है। केवल आपकी शंका के समाधान करने के लिए मैंने आपको मृत्यु की बात कही थी। जो मनुष्य हर समय यह बात याद रखता है कि आखिर तो एक दिन जाना है, तो काम वासना आदि विकार उसके मन में नहीं आता है। मैं मृत्यु को एक पल भी नहीं भूलता हूं। इसलिए पौष्टिक भोजन भी मेरे शरीर में कोई विकार पैदा नहीं कर सकता है। अब तो तुम्हें अनुभव हो गया होगा। राजा ने महात्मा जी के चरण पकड़ लिए। उन्हें महात्मा जी का उतर अच्छी तरह समझ में आ गया। साथ ही राजा को इस बात की खुशी हुई कि मेरी मृत्यु अभी बहुत दूर है।