अमेरिका का भारत को लेकर किया गया एक फैसला निश्चित ही उड़ा देगा चीन की नींद

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वाशिंगटन
चीन यह राग हमेशा अलापता रहा कि एनएसजी नियमों के मुताबिक सदस्यता उन्हीं देशों को दी जानी चाहिए जिन्होंने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर किए हैं। यह सच है कि भारत एनपीटी और सीटीबीटी पर बिना हस्ताक्षर के न्यूक्लियर सप्लायर समूह (एनएसजी) में जगह चाहता है। भारत की मुसीबत यह है कि एनएसजी के 48 सदस्यों में चीन भी है और भारत का इसमें शामिल होना उसे खटकता है। रही बात एनपीटी और सीटीबीटी की यह उसका बहाना मात्र है। दरअसल इस समूह में शामिल होने से न केवल ईंधन, बल्कि तकनीक का भी आदान-प्रदान सहज हो जाता है। फिलहाल बरसों से भारत इसकी सदस्यता हेतु दुनिया के देशों से समर्थन जुटा रहा है, पर नतीजे अभी भी खटाई में हैं, परंतु इस बीच एक सुखद सूचना यह आई कि बिना एनएसजी के सदस्यता के ही भारत अमेरिका से असैन्य अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र में उच्च तकनीक वाले उत्पाद खरीद सकेगा।