नवरात्रि व्रत विधि : इस विधि का उपयोग करना हो सकता है शुभ मां दुर्गा के पूजन में

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नवरात्रि व्रत विधि : नवरात्र हिन्दुओं का ऐसा पर्व है जिसमें मां दुर्गा का पूजन किया जाता है। नवरात्र का अर्थ है नौ रात, जिसमें मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। सबसे पहले भगवान रामचंद्र ने समुंद्र के किनारे नौ दिन तक दुर्गा मां का पूजन किया था और इसके बाद लंका की तरफ प्रस्थान किया था। फिर उन्होंने युद्ध में विजय भी प्राप्त की थी, इसलिए दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है और माना जाता है कि अधर्म की धर्म पर जीत, असत्‍य की सत्‍य पर जीत के लिए दसवें दिन दशहरा मनाते हैं। नवरात्र के दिनों में मां दुर्गा कैलाश छोड़कर धरती पर आकर रहती हैं। नवरात्रों में मां दुर्गा का पूजन करके भक्त मनोवांछित फल पाते हैं। पुराणों में नवरात्रों की महिमा का बहुत सुंदर गुणगान मिलता है। स्वयं ब्रह्मदेव ने मां के नवरात्रों की महिमा बृहस्पति देव को बताते हुए उस ब्राह्मण पुत्री के बारे में कथा सुनाई जिसने सबसे पहले देवी दुर्गा के नवरात्र का उपवास रखा था।
नवरात्र की पूजा के लिए आवश्यक सामग्री-
नवरात्र के पहले दिन प्रतिपदा तिथि को घट की स्थापना की जाती है और उस दिन व्रत करने का संकल्प लें। घट को भगवान गणेश का रूप माना जाता है और किसी भी तरह की पूजा में सबसे पहले पूजा जाता है।
घट स्थापना के लिए कुछ जरुरी सामान चाहिए जैसे कि पाट (जिस पर देवी मां को विराजमान किया जाएगा), जौं, साफ और शुद्ध मिट्टी,लाल कपड़ा या चुनरी, चावल, कलश, फूल, नारियल, आम के पत्ते, मिठाई, धूप, अगरबत्ती, कपूर, लौंग, देसी घी, शुद्ध जल से भरा हुआ चांदी,  सोने या फिर तांबे का लोटा, कलावा, फूलों की माला, सुपारी इत्यादि। इस सामान के साथ आप देवी मां और उसके ९ रूपों की पूजा-अर्चना शुरू करें।
नवरात्र की पूजा विधि-
नवरात्र वाले दिन सुबह जल्दी उठ स्नान आदि के बाद घर में धरती माता, गुरु देव तथा भगवान गणेश का आह्वान करने के बाद घट की घर में स्थापना करे। इसके बाद घट में आम के पत्ते व पानी डाले और कलश में नारियल को लाल कपडे़ अथवा मोली से बांधकर रखे। इसमें दो बादाम, दो सुपारी तथा एक सिक्का जरूर डाले। इसके बाद मां सरस्वती, मां लक्ष्मी तथा मां दुर्गा की पूजा करें। जोत व धुप की बत्ती जलाकर माता का पाठ करे। नवरात्र की समाप्ति घर में उस कलश के जल से छीटे मारे और कन्या पूजन करने के पश्चात प्रसाद वितरण करे। नवरात्र में हवन एवम कन्या पूजन अत्यन्त आवश्यक है। नारदपुराण में हवन एवम कन्या पूजन के बिना नवरात्र पूजा अधूरी मानी गयी है। इसके अलावा नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा के लिए लाल रंग के फूल एवम इस रंग की चीजों का प्रयोग फलदायी माना गया है। नवरात्र में 'श्री दुर्गा सप्तशती' का पाठ करने से इच्छित फल की प्राप्ति होती है।