बेटियों का लिंगानुपात बढ़ाने के लिए समाज के हर तबके की भागीदारी जरूरी : माहेश्वरी

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  •     अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर पीसीपीएनडीटी जागरूकता कार्यक्रम में बेटियों को बचाने का लिया संकल्प

जयपुर   उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्रीमती किरण माहेश्वरी ने कहा कि समाज में अगर बेटियों का लिंगानुपात बढ़ाना है तो उन्हें सुरक्षित रखने का विश्वास और खुशनुमा माहौल देने का संकल्प लेना होगा। उन्होंने कहा कि यह काम किसी सरकार विशेष का नहीं है। समाज के हर तबके को इस पुनीत काम में भागीदारी दिखानी होगी। 
श्रीमती माहेश्वरी बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर इंदिरा गांधी पंचायतीराज संस्थान में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और कॉलेज शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पीसीपीएनडीटी जागरूकता कार्यक्रम में बोल रही थी। उन्होंने कहा कि बेटियां परिवार की धुरी होती हैं। उनको बचाकर ही आने वाले कल को संवारा जा सकता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं का सम्मान हो, मान बढ़े और वे खुश रहे ऐसा माहौल उन्हें देना होगा। समाज की सोच में बदलाव लाना होगा।  उन्होंने कहा कि बेटियां हर मामले में अपनी पहचान बना रही हैं, आगे बढ़ रही हैं। पिछले तीन सालों में राजकीय कॉलेजों में पढऩे वाली बालिकाओं की संख्या 1 लाख 36 हजार 465 से बढ़कर 1 लाख 75 हजार 221 हो गई है। यह बदलाव समाज के लिए अच्छा संकेत है। उन्होंने कहा कि समाज का हर महिला और पुरूष यदि एक बेटी की किस्मत को संवारने का बीड़ा उठा ले तो आने वाले समय में नजारा कुछ और ही होगा। इससे पहले चिकित्सा एवं स्वास्थ्य म ने कहा कि प्रदेश में 0-6 वर्ष बालिकाओं के लिंग अनुपात में खासी बढ़ोतरी हुई है। सरकार की तत्परता का अंदाजा इन आंकड़ों से लगाया जा सकता है कि पिछले तीन सालों में 61 डिकॉय ऑपरेशन किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पीसीपीएनडीटी एक्ट को सरकार ने सख्त और मजबूत बनाया है जिससे भू्रण हत्या या लिंग परीक्षण के मामलों में खासी गिरावट आई है। उन्होंने आह्वान किया कि सभी को साथ मिलकर भ्रूण हत्या के खिलाफ अभियान में भागीदारी दिखानी होगी ताकि आने वाले समय में प्रदेश का महिला और पुरूषों के लिंगानुपात में कोई अंतर नहीं रहे।  चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री बंशीधर खंडेला ने कहा कि सरकार ने लिंग परीक्षण करने वाले लोगों के खिलाफ मुहीम छेड़ी हुई है।