सभा बीच न सुहात 

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सभा बीच न सुहात, निगुणा गुण ज्यां में नहीं।
है गुण ज्यां रै हाथ, नरियंद अरधै नाथिया।।

राजदरबार में गुणहीन व्यक्ति, जिनमें कि गुण नहीं होता, नहीं सुहाते हैं। लेकिन जिन व्यक्तियों में गुण होता है, उनका सम्मान राजा खुद करते हैं। इसलिए मनुष्य में गुण होना आवश्यक है। 
एक बादशाह की बेगम अपने भाई को वजीर बनवाना चाहती थी। एक दिन उसने बादशाह से कहा कि आप मेरे भाई को वजीर बनाइए और इस वजीर को हटा दीजिए। बादशाह बहुत समझदार था, वह इसके लिए तैयार नहीं हुआ। बेगम ने बहुत हठ किया तो बादशाह ने कहा कि तेरा भाई कुछ जानात बूझता तो हैं नहीं, उसे किस प्रकार वजीर बनाया जाए? लेकिन बेगम फिर भी नहीं मानी। तब बादशाह ने उसके भाई को वहीं बुलवाया और उससे कहा कि यह एक पैसा लो और इसके सब तरह के मसाले ले आओ। वह गया और सारे बाजार में घूम आया, लेकिन किसी ने एक पैसे में सब तरह के मसाले नहीं दिए। तब बादशाह ने फिर उससे कहा कि इसी पैसे से एक लाख रूपये कमा लाओगे तो तुम्हें वजीर बना दिया जाएगा। वह फिर घूम घाम कर आ गया, लेकिन किसी ने एक पैसे के बदले एक लाख रूपये नहीं दिए। तब बादशाह ने बेगम से कहा कि देख ली न अपने भाई की होशियारी? अब बादशाह ने वजीर को बुलवाया और उसे वही पैसा देकर कहा कि एक पैसे के सब तरह के मसाले ले आओ। वजीर गया और हलवाई की दुकान से एक पैसे के बड़े ले आया। बादशाह के पूछने पर वजीर ने स्पष्ट किया कि इन बड़ों में सब तरह के मसाले मौजूद हैं। तब बादशाह ने उसे एक पैसा और दिया ओर कहा कि इससे एक लाख रूपये कमाकर लाओ। ये सब बातें  बेगम के सामने ही हो रही थी। वजीर एक पैसा लेकर रवाना हुआ और वह एक मुरीद के घर गया। वहां से एक पैसे का सूत लिया और उस सूत कीएक रस्सी बना ली। फिर वह उस रस्सी को लेकर बड़े सेठों के मोहल्ले में गया और रस्सी से एक हवेली के कोने नापने लगा। सेठ ने जब अपनी हवेली को नापते हुए वजीर को देखा तो इसका कारण पूछा। वजीर ने कहा कि आपकी हवेली का कोना बहुत आगे निकला हुआ है, अत इसे तुड़वाना होगा क्योंकि बादशाह सलामत की यह इच्छा है कि रास्तों को अधिक चौड़ा बनाया जाए। सेठ ने बहुत मिन्नत की तो वजीर ने बीस हजार रूपये उसी वक्त बादशाह के पास महल में भेजने की बात कही। सेठ ने बीस हजार रूपये उसी वक्त थैलियों में भरवाकर महल में भेज दिए। फिर दूसरे सेठ की बारी आई और फिर तीसरे की। इस प्रकार वजीर ने कई लाख रूपये महल में भिजवा दिए। तब बादशाह ने वजीर को कहलवाया कि अब बस करो। तब वजीर बादशाह के पास पहुंचा। बादशाह ने बेगम को बुलाया और रूपयों के ढेर की ओर इशारा करके कहा कि मैंने इसलिए इसे वजीर बनाया है और तुम्हारे भाई को नहीं। बेगम निरूतर हो गई। वह अब कुछ कहने की स्थिति में नहीं थी।