सराफ: फॉर्टिस एस्कॉर्ट की स्वास्थ्य एवं चिकित्सा की गुणवत्ता एवं तकनीक विकास में भागीदारी सराहनीय

img

जयपुर
फॉर्टिस एस्कॉट्र्स हॉस्पिटल, जयपुर के डिपार्टमेंट ऑफ ऑर्थोपेडिक्स एण्ड ज्वाइट रिप्लेसमेंट टीम द्वारा डॉ. अनूप झुरानी के नेतृत्व में 45 वर्षीय महिला की रोबोट एसिस्टेड ज्वाइन्ट रिप्लेसमेन्ट सर्जरी सफलता पूर्वक की गई, रोगी को घुटने के भीषण दर्द से विगत कई वर्षो से परेशानी थी। यह सर्जरी रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम के माध्यम से की गई जो कि जोड़ प्रत्यारोपण के क्षेत्र में नवीनतम रोबोटिक इंटरविनशन है। रोबोट से सर्जन घुटने के केवल क्षतिग्रस्त हिस्से पूरी निपुणता के साथ फिक्स करता है और घुटने की अन्य संरचना एकदम सुरक्षित एवं पूर्ववत रहती है।
रोबोटिक-एसिस्टेड सर्जरी से सर्जन बढ़ी हुई स्पष्टता, परिशुद्धता एवं नियंत्रित तरीके से शल्य क्रिया करने में सक्षम होता है, यहां तक कि काफी जटिल प्रक्रिया होने के बावजूद वह इसे करने में सक्षम होता है। इसमें कम से कम बोन रिमूवल, प्राकृतिक शरीर विज्ञान (एनोटॉमी) के संरक्षण तथा मरीज को ऑपरशन के बाद इसके अच्छे नतीजे प्राप्त होते हैं। रोबोट एसिस्टेड सिस्टम से मानवीय त्रुटियां रहने की संभावना नहीं रहती और इस तकनीक से सही संरेखन (अलाइनमेंट) तथा ज्वाइंट इम्पलान्ट लम्बे समय तक बना रहता है। 
राजस्थान के इस प्रथम राबोट का उद्घाटन कालीचरण सराफ चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री रजस्थान सरकार ने फॉर्टिस एस्कॉट्र्स हॉस्पिटल में किया। इस अवसर पर कालीचरण जी ने इस अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक को राज्य वासियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताई। उन्होंने कहा कि हमारे राज्य में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा की गुणवत्ता एवं तकनीक विकास में फॉर्टिस जयपुर की भागीदारी सराहनीय रही है, एक बार फिर से राज्य को एक अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक समर्पित कर फॉर्टिस ने स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में अपनी साख बनाई हैं।
इस अवसर पर फॉर्टिस एस्कॉट्र्स हॉस्पिटल जयपुर के डायरेक्टर ज्वाइंट रिप्लेसमेंट डॉ. अनूप झुरानी ने कहा 'रोबोट की मदद से ज्वाइंट रिप्लेसमेन्ट किए जाने से रोगी को भारी लाभ है, और उसे उसी दिन या एक दिन के विश्राम के बाद अस्पताल से छुट्टी देदी जाती है और इस षल्य क्रिया में न्यूनतम रक्त हानि होती है। यह मरीज को अत्यधिक संतुश्टि प्रदान करने वाली है क्यों कि इससे ज्वाइन्ट की अन्य संरचना पूर्णत: सरंक्षित एवं यथावत रहती है। युवा लोगों के लिए भी यह इसी प्रकार लाभप्रद रहता है और वे पुन: षीघ्र ही अपनी जीवनषैली को सक्रिय रहते हुए बिता सकते हैं और बुजुर्ग लोग जिनके लिए घुटना प्रत्यारोपण काफी जोखिमपूर्ण माना जाता है उनके लिए भी यह समान रूप से उपयुक्त है।''
उन्होंने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि ''हमने अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी रोबोटिक टेक्नोलॉजी से आंषिक एवं पूर्ण घुटना प्रत्यारोपण की चिकित्सा सफलता पूर्वक की है, और मरीज के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार के बाद उसे 2 दिन बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।''
फॉर्टिस एस्कॉट्र्स हॉस्पिटल जयपुर के जोनल डायरेक्टर प्रतीम तम्बोली ने इस मौके पर कहा हमारे ''एडवांस रोबोटिक्स के ऑर्थोपेडिक्स के क्षेत्र में प्रवेष के साथ ही मरीजों को केवल एक दिन की देखभाल जितने समय में षल्य उपचार मिल सकेगा। फॉर्टिस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सर्वदा अग्रणी रहा है तथा ऑर्थोपेडिक्स मरीजों के लिए पूरे विष्वभर का केन्द्र बिन्दू रहा है, और यही हमारा दृश्टिकोण भी है। रोबोट एसिस्टेड ज्वाइंट रिप्लेसमेंट के साथ ही हमने इस नेतृत्व को और उच्च स्तर पर कर लिया है, और हमे प्रसन्नता है कि हम राज्य में विष्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं।  क्योंकि भारत में इस टेक्नोलॉजी को यूएस के तत्काल बाद भारत में फॉर्टिस हॉस्पिटल में लांच किया गया है, और हम विष्व में दूसरा देष है जिसने इसे सफलता पूर्वक अंगीकार किया है।''
अपनी प्रसन्नता जाहिर करते हुए जयपुर निवासी मरीज का कहना था कि ''मैं विगत पांच वर्शों से घुटनों के दर्द से काफी परेषान थी, क्यों कि मैं इस  प्रकार की सर्जरी से काफी भयभीत रहती थी। दो माह पूर्व यह दर्द काफी असहनीय हो गया, और मेरे पास सर्जरी के अलावा कोई और विकल्प ही नहीं बचा था। मैं काफी भयभीत थी कि मुझे इसके लिए अस्पताल में काफी दिनों तक रुकना पड़ेगा और सर्जरी के बाद किसी भी प्रकार का संक्रमण हुआ तो क्या होगा? इसी डर को लेकर मैं इस सर्जरी में विलम्ब करता रही। हालांकि, मुझे यह जानकर काफी खुषी हुई कि अब वह अवसर आ गया है, कि मुझे देष में देष की पहली रोबोट एसिस्ट नी सर्जरी करवाने का अवसर मिला है।