हम तो सतर्क हो जाएंगे, आप क्या करेंगे?

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पूरे प्रदेश में जगह-जगह पर बिजली के बाक्स खुले हैं। खुले तार सड़कों, फ्लाई ओवरों के डिवाइडरों, बिजली के खंभों के नीचे, बरसात के पानी में करंट दौड़ा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि राजस्थान के विद्युत निगम, डिस्काम एवं विद्युत वितरण विभाग को मालूम नहीं हैं। यही नहीं हर साल समाचार पत्रों में इनके बारे में खूब छपता है। खुले तारों, झुलते तारों, हाइटेंशन लाइनों से होने वाले हादसों की खबरें छपती है लेकिन होता क्या है। वहीं ढाक के तीन पात। मर गया सो मर गया। घायल हुआ तो अस्पताल मेंं। लेकिन बिजली विभाग जनता के लिए सावधानियों की सूची प्रकाशित कर अपने दायित्व की इतिश्री मानती है। क्यों नहीं वह वर्षा से पूर्व इन खुले बिजली बाक्सों, झुलते तारों, तारों के मकडज़ालों, सड़कें एवं डिवाइडरों पर खुले तारों की जांच पड़ताल कर उन्हें दुरूस्त करती? क्यों नहीं इसका कोई स्थाई समाधान ढंूढती? क्या विभाग या कंपनी के पास पैसा नहीं है? ऐसा नहीं है। विभाग में गैर जिम्मेदारी है अपने मूल दायित्व को प्रति। विद्युत वितरण निगम का दायित्व केवल बिजली आपूर्ति करना मात्र नहीं हैं। बल्कि सुरक्षित व्यवस्था विकसित करना भी उसका प्राथमिक दायित्व है। हम तो अपनी जान बचाने के लिए सजग और सतर्क रहेंगे। पर आप क्या करेंगे? सिर्फ सावधानियों की सूची जारी करेंगे। बिजली वितरण की असुरक्षित व्यवस्थाओं के बारे में विद्युत निगम कई सालों से कोताही बरत रहा है। निगम के लिए इन्सान की जान सस्ती है लेकिन अपनी कमियों को दूर करना बहुत महंगा है। पूरे प्रदेश में करंट लगने, झुलते तारों से दुर्घटनाएं होने, तारों के मकडज़ाल से अग्निकांड होने और हाईटेंशन लाइनों से मौतें होने के आंकड़े निगम को चिढ़ा रहे हैं लेकिन वह हर साल उन्हें दुरूस्त करने की बजाए सावधानी की सूची व निर्देश जारी करने से नहीं चूकता।