यूएन के संवर्धनीय विकास लक्ष्य को हासिल करने हेतु जेकेएलयू में अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस

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जयपुर
अंतरराष्ट्रीय स्तर की बेहतरीन प्रैक्टिस को बढावा देने और भारत को संयुक्त राष्ट्र के संवर्धनीय विकास के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में भारत की गति को तेज करने के उद्देश्य से अग्रणी प्रयोग आधारित संस्थान जेके लक्ष्मीपत यूनिवर्सिटी एक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस आयोजित कर रहा है। इस अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का विषय है ‘इनोवेशन इन टेक्नॉलजी एंड मैनेजमेंट फॉर अचीविंग सस्टेनेबल गोल्स (एसडीजी)’ कॉन्फ्रेंस के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से सम्बंध रखने वाले भारत और अन्य देशों के जाने-माने वक्ता सम्बंधित विषयों पर अपने विचार व्यक्तकरेंगे। युनाइटेड नेशन के संवर्धनीय विकास लक्ष्य (एसडीजी), जिसे 2030 तक हासिल करना है, ये वे महत्वपूर्ण लक्ष्य हैं जिन्हें हसिल करने का जज्बा बरकरार रखना आवश्यक है वह भी तब जब मिलेनियम डेवेलपमेंट गोल फेल हो चुका है। नए लक्ष्य एक होलिस्टिक पद्धति उपलब्ध कराते हैं जिसमे संवर्धनीय विकास के तीन हिस्सों को शामिल किया गया है, ये हैं: आर्थिक विकास, सामाजिक समावेश और पर्यावरण सम्बंधी संवर्धनीयता। सुधार का यह एजेंडा वह जरूरत है जिसे सरकार और समाज दोनों को मिलकर पूरा करना होगा। इस कॉन्फ्रेंस में गरीबी उन्मूलन अच्छी सेहत व कल्याण, खाद्य सुरक्षा, संवर्धनीय कृषि, कृषि-परिस्थितिकी, एग्रो-ईको-एंटरप्रन्योरशिप, एग्रो-ईको-टूरिज्म, क्वालिटी एजुकेशन, लैंगिक समानता, स्वच्छ जल व सफाई के लिए संवर्धनीय प्रबंधन, सस्ती, अक्षय व स्वच्छ ऊर्जा, सस्टेनेबल डेवेलपमेंट और इसे हासिल करने के लिए आवश्यक कौशल, बिजनस स्मार्ट सिटी के मामले में आविष्कार, सस्टेनेबल मैनुफैक्चरिंग, सस्टेनेबल क्लाइमेट, सस्टेनेबल गवर्नेंस, पार्टनरशिप, आईटी प्रैक्टिसेज, मैनेजमेंट प्रैक्टिसेज और औद्योगीकरण, स्टार्ट-अप में इनोवेशन, प्राकृतिक संसाधन और ईको सिस्टम सेवाएँ, इन्क्लूसिव सोसायटीज और इन्क्लूसिव संस्थान। डॉ. आर. एल. रैना, वीसी जेके लक्ष्मीपत यूनिवर्सिटी, जयपुर का कहना है, ‘समाज के पिछडे तबके को आगे लाने के लिए एसडीजी एक दीर्घ-कालिक योजना है। भोजन व ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री से सम्बंधित उपभोग के संदर्भ में पहले से स्थापित पैटर्न, जिसका वातावरण पर काफी बुरा असर पड रहा है, को बदल पाना बेहद कठिन काम है। तकनीकी प्रयोग न सिर्फ वायु प्रदूषण को कम करने के लिए अधिक स्वच्छ व बेहतर फिल्टर तैयार किए जा सकते हैं जिससे ईंधन से निकलने वाले प्रदूषक तत्व कम हो सकते हैं बल्कि स्वच्छ वैकल्पिक ऊर्जा भी तैयार की जा सकती है और इलेक्टिक एवम हाइब्रिड वाहनों की क्षमता में बढोत्तरी हो सकती है। इसी प्रकार से, इन सभी लक्ष्यो को जल्द से जल्द हासिल करने के लिए मैनेजमेंट विजन और संस्थानों को भी इसमे अपनी भूमिका निभानी होगी। एक अग्रणी इंजिनियरिंग व एमबीए प्रशिक्षण संस्थान के तौर पर जेकेएलयू इस तरह से कार्य करता है जहाँ सभी सम्बंधित सहभागियों के विचारों को स्थान दिया जाता है। श्री आशीष गुप्ता, प्रो वीसी, जे के लक्ष्मीपत यूनिवर्सिटी, जयपुर का कहना है, ‘‘वैश्विक समाज को एकजुट करने के लिए नए और आविष्कारी समाधान की जरूरत है। इस तरह के कंवेंशन की जरूरत है क्योंकि इससे सभी क्षेत्रों के साझीदारों को सशक्त बनाने और सम्पूर्ण क्षेत्र के साझीदारों, देशों और क्षेत्रों की नेटवर्किंग का कार्य आसान हो जाता है। इस तरह के कॉन्फ्रेंस के जरिए मौजूदा समय में उपलब्ध बेहतरीन प्रैक्टिस को बढावा देना और इस सम्बंध में विशेषज्ञता के आदान-प्रदान में काफी महत्वपूर्ण साबित होते हैं। यह उम्मीद की जा रही है कि अगले 15 सालों में तय किए गए लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी सहयोगी अपनी भूमिका निभाएंगे। उपरोक्त वादों को पूरा करने के लिए, और बदलाव की इस यात्रा का हिस्सा बनने हेतु, एक ऐसे मंच की तुरंत आवश्यकता है जहाँ एक छत के नीचे सभी सम्बंधित क्षेत्रों के लोग एकत्र हो सके।

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