कंधार यूनिवर्सिटी और आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के बीच हुआ समझौता पत्र पर हस्ताक्षर

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नई दिल्ली
छात्रों को काम के वैश्विक वातावरण हेतु तैयार करने के उद्देश्य से अग्रणी स्वास्थ्य देखभाल एवम सम्बद्ध प्रबंध संस्थान, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थकेयर मैनेजमेंट एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी (आईआईएचएमआरयू) ने अफगानिस्तान की कंधार यूनिवर्सिटी (केडीआरयू) के साथ हाथ मिलाया है ताकि न सिर्फ फैकल्टी सदस्य और छात्रों का आदान-प्रदान हो सके बल्कि अन्य ऐसे सम्बद्ध कार्यकलाप भी एक-दूसरे के साथ साझा किए जा सकें जिससे छात्रों को सीखने का वैश्विक अनुभव हासिल हो सके। कंधार यूनिवर्सिटी अफगान रिपब्लिक के अग्रणी संस्थानों में से एक है जिसमें 3 रिसर्च सेंटर, 12 फैकल्टीज और 10,000 छात्र हैं। आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी का बेहतरीन ट्रैक रेकॉर्ड और भारत सरकार के स्वास्थ्य एवम परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जन स्वास्थ्य, स्वास्थ्य एवम हॉस्पिटल प्रबंधन, फार्मास्युटिकल प्रबंधन और ग्रामीण प्रबंधन के क्षेत्र में ‘इंस्टिट्यूट ऑफ एक्सिलेंस’ के रूप में पहचान न सिर्फ छात्रों को एक वैश्विक अनुभव का लाभ दिलाएगी बल्कि इससे भारत व अफगान के बीच सम्बंध भी प्रगाढ होंगे।आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट, डॉ. पंकज गुप्ता ने कहा कि, ‘‘इस साझेदारी का केंद्र बिंदु होगा फैकल्टी और छात्रों का आदान-प्रदान, संयुक्त शोध, सेमिनार और अकादमिक बैठकें कराना, अकादमिक मटीरियल व अन्य जानकारियों का आदान-प्रदान, लघुकालिक व दीर्घकालिक कार्यक्रमों का आयोजन कराना और उन कार्यकलापों के लिए फंड जुटाना। हम संयुक्त पाठ्यक्रम तैयार करने में भी सहयोग कर सकते हैं जिससे हमारे छात्रों को लाभ होगा। क्योंकि इस सबका उद्देश्य है छात्रों को एक अंतरराष्ट्रीय वर्कप्लेस के तैयार करना, छात्र अपनी यात्राओं के अनुभव से काफी कुछ सीखते हैं साथ ही यूनिवर्सिटी को इस नई पहल से अफगान की संस्कृति को भी करीब से समझने का अवसर मिलेगा और यह जानने में आसानी होगी कि अफगान और भारत के बीच क्या समानताएँ हैं। इतना ही नहीं, ऐसा कहा जाता है हर पांच में से एक वैज्ञानिक पेपर दो अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों द्वारा मिलकर लिखा जाता है। चूंकि अब संचार के साधन काफी विकसित हो चुके हैं और अंतरराष्ट्रीय यात्राएँ आसान हो गई हैं, ऐसे में अकादमिक्स और रिसर्चर्स के लिए विद्शों में अपने लिए सहयोगी की तलाश कर पाना आसान हो गया है। साथ ही अब अकादमिक विचारों का व्यवस्थित आदान-प्रदान भी सहज हो चुका है। वैज्ञानिक निष्पादन के लिए बारीकी से जांच, डिबेट और अनुभवों के सन्योजन जैसे कौशल की आवश्यकता होती है। पहले से स्थापित विचारो और आइडिया को सही ढंग से चुनौती देना ही विकास का प्राथमिक स्तर होता है और अंतरराष्ट्रीय संयोजन से यह सब सम्भव हो जाता है। अकादमिक और वैज्ञानिक प्रगति में इस तरह के संयोजन हमेशा से अपनी भूमिका निभाते रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाले केंद्रीय कैबिनेट ने भारत और अफगान के बीच एमओयू के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है, जो कि ऑनलाइन लर्निंग मोड स्वयम के जरिए देश के मानव संसाधन विकास में सहयोग को बढाएगा। 

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