संवर्धनीय विकास लक्ष्य पर जेकेएलयू में कॉन्फ्रेंस का आयोजन दुनिया भर के प्रतिनिधियों ने रखे अपने विचार

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जयपुर
गरीबी उन्मूलन और स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढाने जैसे सार्वभौमिक मुद्दों पर चर्चा के लिए अग्रणी प्रयोगात्मक शिक्षा संस्थान, जेके लक्ष्मीपत यूनिवर्सिटी ने एक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जिसका विषय था ‘इनोवेशन इन टेकनॉलजी एंड मैनेजमेंट फॉर अचीविंग सस्टेनेबल डेवेलपमेंट गोल्स (एसडीजी)। कॉन्फ्रेंस का आयोजन यूनिवर्सिटी के जयपुर स्थित कैम्पस में 1-3 फरवरी 2019 के बीच किया गया। इस कॉन्फ्रेंस ने एक ऐसा मंच उपलब्ध कराया जहाँ रिसर्चर्स, प्रैक्टिशनर्स शैक्षिक संस्थान, प्राइवेट क्षेत्र, सरकार, योजनाकार, सिविल सोसायटी, कृषि व प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधक और अन्य सम्बंधित लोगों ने एक साथ मिलकर समस्याओं के बारे में चर्चा की और उनके समाधान हेतु सुधार के उपाय ढूंढने में अपने योगदान दिए। इस मौके पर मुख्य अतिथि के तौर पर श्री कमल सिंह, एक्जिक्युटिव डायरेक्टर, यूएन ग्लोबल कॉम्पैक्ट नेटवर्क इंडिया ने हिस्सा लिया। डॉ.आर. एल. रैना, कॉन्फ्रेंस पैट्रन एंड माननीय वाइस चांसलर, जेकेएलयू ने अपने स्वागत अभिभाषण में ‘सस्टेनेबल डेवेलपमेंट गोल्स’ विषय पर आयोजित कॉन्फ्रेंस के उद्देश्यों के बारे में बताया और इसे यूनिवर्सिटी में होने वाले आविष्कार व विकास के साथ जोडा। उन्होने कहा कि, ‘‘मैं युवा पीढी से यह गुजारिश करता हूँ कि वे समाज के कल्याण हेतु प्राकृतिक संसाधनों का वाजिब इस्तेमाल करेंं। एक समाज और सभ्यता के तौर पर विकास निरंतरता तभी बरकरार रह सकती जब हमारी सोच सार्वभौमिक होगी और आदतें उसके अनुकूल। इसके बाद, श्री आशीष गुप्ता, माननीय प्रो.वाइस चांसलर, जेकेएलयू ने कहा कि, कॉन्फ्रेंस की थीम जेकेएलयू की यात्रा को बडे ही सटीक तरीके से दर्शाती है। उन्होने कहा, ‘‘जेकेएलयू का मुख्य उद्देश्य है न सिर्फ भारत में बल्कि विदेशों में भी सबसे आविष्कारी संस्थान के रूप में अपनी पहचान बनाना। यूनिवर्सिटी द्वारा हाल के दिनो में की गई तमाम पहल जैसे कि इंस्टिट्यूट ऑफ डिजाइन की शुरुआत, सेंटर फॉर कम्युनिकेशन एंड क्रिटिकल थिंकिंग की स्थापना आदि, संस्थान के लक्ष्य की ओर बढने वाले मजबूत कदम हैं।’’ डॉ.ज्योति प्रकाश सी आर नायडू ने कॉन्फ्रेंस की थीम के बारे में बताया और कहा कि, ‘‘जीवन के हर क्षेत्र में सस्टेनेबल डेवेलपमेन्ट का लक्ष्य तय करने की जरूरत है, चाहे वह क्षेत्र कृषि हो, मेडिकल हो, कम्प्युटर साइंस हो अथवा साइकोलॉजी। डॉ. संजय गोयल, डायरेक्टर, इंस्टिट्यूट ऑफ इंजिनियरिंग एंड टेकनॉलजी, जेकेएलयू ने संस्था में शिक्षण-शिक्षा की प्रक्रिया के बारे में बताया जो कि अधिकतर प्रयोग आधारित शिक्षा है। कॉन्फ्रेंस की थीम पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि, ‘‘मानवीय जरूरतों और आकांक्षाओं की संतुष्टि ही विकास का मुख्य लक्ष्य होता है। इसके बाद गेस्ट ऑफ ऑनर, डॉ. करीम एमएच, यूनिवर्सिटी ऑफ खराज़्मी, तेहरान, ईरान ने कहा कि, ‘‘साइंस और तकनीक के फल के रूप में आविष्कार सस्टेनेबल डेवेलपमेंट के लक्ष्य को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएंगे। सस्टेनेबल डेवेलपमेंट वह विकास है जिसमें न सिर्फ मौजूदा समय की जरूरतें पूरी करने की क्षमता हो बल्कि भविष्य की पीढियों की जरूरतों को पूरा करने की क्षमता की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो। मुख्य अभिभाषण श्री प्रमोद कुमार जैन (ईडी-डिजाइन) एनसीआरटीसी ने दिया। उन्होनें यातायात के संसाधनों के परिप्रेक्ष्य में कॉन्फ्रेंस की थीम पर चर्चा की और सस्टेनेबल विकास के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत सरकार द्वारा की गई पहल पर प्रकाश डाला। रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) उनमें से एक है जो सडक आधारित यातायात पर लोगों की निर्भरता को कम करेगा। उद्घाटन अभिभाषण मुख्य अतिथि श्री कमल सिंह, एक्जिक्युटिव डायरेक्टर, यूएन ग्लोबल कॉम्पैक्ट नेटवर्क इंडिया ने दिया। उन्होने एसडीजी के बारे में बात की और इसे तमाम उदाहरणों के जरिए समझाया कि किस तरह से ये एक गेम चेंजर का काम कर रहे हैं। उन्होने तीन चरणों के बारे में बात की, जैसे कि राष्ट्रीय, राज्य और नगर निकायों के बारे में जिनके स्तर पर सस्टेनेबल डेवेलपमेंट के लक्ष्य को पूरा किया जाना चाहिए। उन्होनें आगे कहा कि सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लक्ष्य को हासिल करने में नगर निकायों की भूमिका बेहद अहम है। शिक्षा के क्षेत्र में एसडीजी के अवसरों के बारे में चर्चा करते हुए उन्होने जेकेएलयू के प्रयासों की सराहना की। इसके बाद मुख्य अतिथिए गेस्ट ऑफ ऑनर और मुख्य वक्ता को यादगार भेंट किया गया। उद्घाटन समारोह का समापन धन्यवाद प्रस्ताव के साथ किया गया जिसे प्रस्तुत किया कॉन्फ्रेंस की को-कन्वीनर डॉ. रिचा शर्मा ने। 

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