‘एक दूजे के लिए’ को लेकर एक बात का अफ़सोस आज भी कमल हासन को सताता है

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मुंबई

कमल हासन मानते हैं कि फिल्मों का मतलब सिर्फ एंटरटेनमेंट करना ही नहीं होना चहिये. फिल्में सिर्फ धंधा करने का माध्यम नहीं है. कमल कहते हैं कि मुझे लगता है कि यह हमारी एक बड़ी जिम्मेदारी बनती है. कमल के मुताबिक बड़े गुलाम अली साहब, के आसिफ, सत्यजित रे ऐसे कई नाम हैं, जिन्होंने ये जिम्मेदारी खूब निभाई है. हम कैटेलिस्ट हैं. समाज को अनुभव कराने के लिए. उन्हें महत्व देने के लिए. हम एक उद्घोषक हैं, जो बताते हैं कि क्या आ रहा है. अच्छे दिन आ रहे हैं या बुरे दिन ये सिर्फ नेता ही क्यों कहें. आर्टिस्ट को भी बताना चाहिए. कमल कहते हैं कि कई बार सबसे बुरे दौर में आर्टिस्टों ने बताया है कि अँधेरा खत्म होगा, सवेरा आएगा. कमल ने कहा - मैं बताना चाहूँगा कि एक दूजे के लिए, रिलीज़ हुई और लोगों ने आत्महत्या करना शुरू कर दिया तो मैं और निर्देशक के बालचंदर बहुत दुखी थे. हम बहुत दुखी थे और हैरान थे. हमें लगा कि लोगों तक गलत संदेश जा रहा है. उसके बाद हमने तमिल में एक फिल्म बनायीं, जो एक दूजे की सोच के विपरीत थी. हम हिदी में भी बनाना चाहते थे लेकिन अफ़सोस है कि बना नहीं पाए. इसलिए आप जब एक आर्टिस्ट के रूप में कुछ भी कर रहे होते हैं तो आप अलर्ट रहना पड़ता है. आप बस फिल्म बना कर आगे निकल जाएँ और सोचें कि हमने तो सिर्फ फिल्म बनाई है. आप ऐसा नहीं कर सकते. क्योंकि आपको मानना होगा कि एक बड़ा वर्ग आपसे प्रभावित होता है. विश्व्ररूपम के पहले भाग को लेकर काफी विवाद हुआ था. इसके बारे में बात करते हुए कमल कहते हैं कि कंट्रोवर्सी कोई नहीं थी. ये तो वहीं बात होती अगर कोई ये कह थे कि अमर अकबर एंथोनी में मुस्लिमों का अपमान हो रहा है. अगर आप किसी भी फिल्म को आप टारगेट करना चाहोगे तो आप मौका तलाश ही लेंगे. फिल्म रोटी कपड़ा और मकान में पंजाबी समुदाय का अपमान मान लेंगे, क्योंकि प्रेमनाथ सरदार बनें थे. शोर फिल्म को देखकर आप कह सकते हैं कि यह उन लोगों का अपमान है, जो लोग सुन नहीं सकते हैं. हिंदी फिल्मों का नहीं बता सकता, लेकिन मुझे नहीं लगता कि तमिल में हाल के समय में मुस्लिम किरदार को फिल्म का नायक बनाया है.

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