राना राजस्थानी संस्कृति एवं जीवनशैली में हमें जीना सिखाती है : सरन घई

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जयपुर/ टोरंटो
अमरीका में राना राजस्थान एसोसिएशन और नॉर्थ अमरीका, प्रवासी राजस्थानियों में अपनी संस्कृति, परम्परा एवं सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति समगता एवं स्नेह की भावना सिखाती है। विदेशों में रहकर भी अपनी परम्परागत जीवनशैली को बरकरार रखने का संदेश राना देती है। मैं राना से कई वर्षों से सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ हूं। मैं इसे प्रवासी राजस्थानियों की यहां एक कारगर संस्था मानता हूं। हमारी एक पत्रिका प्रयास हैं जिससे 20 देशों के लेखक जुड़े हुए है। इसकें एक लाख सब्सक्राईबर है। यह बात 'प्रयास' पत्रिका के संपादक सरन घई ने कनाडा में दैनिक जलतेदीप को दिये एक विशेष साक्षात्कार में कही। घई ने बताया कि अमरीका एवं कनाडा में प्रयास पत्रिका मीडिया के कई कार्यक्रम एवं कवि सम्मेलन आयोजित करती रहती है। अमरीका, कनाडा, आबूधाबी में राना की तरफ तीज, त्यौहार एवं उत्सव मनाए जाते है। प्रतिवर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर टोरेन्टो में विशाल कवि सम्मेलन आयोजित किया जाता है जिसमें 70-80 हजार लोग भाग लेते है। हम हिन्दी को एक वैश्विक भाषा का दर्जा दिलाने के पक्षधर है वहीं राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाने की भी वकालत करते है। हम राना के माध्यम से हिन्दूओं के सभी पर्व दीपावली, दशहरा, होली, गणगौर को उसी स्वरूप में अपने घरों में एवं एक साथ सामूहिक रूप में भी मनाते हैं। घई ने बताया कि यहां बाहर निकलते ही अंग्रेजी बोलनी पड़ती है लेकिन प्रत्येक घर में राना के सभी सदस्यों का यही प्रयास रहता है कि अपनी मातृभाषी राजस्थानी में ही अपने परिवार के सदस्यों एवं बच्चों से बातचीत की जाये। यहां राना की तरफ से जब भी कोई कार्यक्रम एवं उत्सव मनाया जाता है तो राना के सदस्यों को अपने परिवारजनों एवं बच्चों को इसमें शामिल होने के लिए प्रेरित किया जाता है।

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