वुहान शिखर वार्ता के साए में मजबूत हो रहे हैं भारत और चीन के रिश्ते

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बीजिंग
सीमा पर आपसी विश्वास बढ़ाने के लिए गुरुवार को भारत और चीन के अधिकारियों की बैठक हुई। सीमा पर वार्ता के लिए गठित समिति की इस 12 वीं बैठक में सीमावर्ती इलाकों के मामले प्रभावी तरीके से निपटाने पर चर्चा हुई। बातचीत के जरिये सीमा विवाद निपटाने के लिए इस समिति का गठन सन 2012 में किया गया था। सिचुआन प्रांत के चेंगडू शहर में आयोजित बैठक के संबंध में भारतीय दूतावास ने बताया कि चीनी सैनिकों के सीमा पार करने की घटनाओं को भारतीय पक्ष ने उठाया। बैठक में सभी तरह की गलतफहमियों को दूर करने के लिए देरी न करते हुए प्रयास करने पर सहमति बनी। भारतीय पक्ष ने सीमा पर शांति बनाए रखने पर जोर दिया। यह दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों के विकास के लिए जरूरी है। दोनों देशों के अधिकारियों ने सीमा के हालात की समीक्षा की और शीर्ष नेताओं की वुहान में बनी सहमति के आधार पर विवादों को निपटाने का फैसला किया। उल्लेखनीय है कि डोकलाम में 2017 में बने 73 दिनों के गतिरोध को भुलाते हुए वुहान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने अनौपचारिक मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने इस मुलाकात में परस्पर विश्वास और सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। चीन में भारत के राजदूत गौतम बंबावले ने कहा है कि वुहान में हुई शिखर वार्ता के बाद दोनों देशों के रिश्तों में मजबूती आई है। इससे दोनों देशों के सीमा पर भी रिश्ते मजबूत हुए हैं। भारत और चीन की सीमाएं करीब चार हजार किलोमीटर लंबी हैं। कई स्थानों पर इस सीमा को लेकर विवाद हैं। इन विवादों को निपटाने के लिए अभी तक 20 बार वार्ता हो चुकी है।

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