तिब्बतियों पर अपने दलाई लामा को थोपने के चीन के प्रयास का विरोध करेगा अमेरिका

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अमेरिका ने संकेत दिया है कि तिब्बत के लोगों पर चीन द्वारा अपना दलाई लामा थोपे जाने के किसी भी कदम का वह विरोध करेगा क्योंकि वॉशिंगटन का मानना है कि तिब्बत के वर्तमान शीर्ष बौद्ध नेता के उत्तराधिकारी का चुनाव धार्मिक परंपराओं के मुताबिक होना चाहिए और इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए। चीन को इस बात की चिंता सता रही है कि 14वें दलाई लामा का उत्तराधिकारी कौन होगा। वर्तमान दलाई लामा की उम्र 83 वर्ष है और फिलहाल वह निर्वासन में भारत में रह रहे हैं। उन्हें शीर्ष लामाओं ने उस समय दलाई लामा घोषित किया था जब वह केवल दो वर्ष के थे। तिब्बत की बौद्ध परंपराओं के मुताबिक जब वर्तमान दलाई लामा का निधन होगा तो दूसरे व्यक्ति के रूप में उनका पुनर्जन्म होगा। चीन का कहना है कि 14वें दलाई लामा के उत्तराधिकारी को नियुक्त करने का अधिकार उसके पास है जो बीजिंग के प्रति वफादार हो। सांसदों के समक्ष ट्रंप प्रशासन के रूख को स्पष्ट करते हुए मंगलवार को लॉरा स्टोन ने कहा कि अमेरिका का मानना है कि धार्मिक निर्णय धार्मिक संगठनों द्वारा किए जाने चाहिए न कि राजनीतिक सत्ता द्वारा। स्टोन पूर्वी एशियाई एवं प्रशांत क्षेत्र मामलों की कार्यवाहक उप सहायक विदेश मंत्री हैं। स्टोन ने पूर्वी एशिया पर सीनेट विदेश संबंध की उप समिति से कहा, अमेरिका का स्पष्ट रूख है कि धार्मिक निर्णय धार्मिक संगठनों के अंदर किए जाने चाहिए और यह काम सरकार का नहीं है। स्टोन सीनेटर कोरी गार्डनर के एक सवाल का जवाब दे रही थीं। सीनेटर ने पूछा था, चीन ने कहा है कि वे अगले दलाई लामा को चुनेंगे। तिब्बत की नीति में बताया गया है कि अमेरिका के अधिकारी नियमित रूप से तिब्बत का दौरा करेंगे। मैं इन दोनों पर बात करना चाहता हूं। अगर चीन दलाई लामा थोपता है तो अमेरिका की क्या प्रतिक्रिया होगी?
 

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