अमरीका में भारत के राजदूत ने दिखाई मानवता

img

  • शिकागो काउन्सलेट में पुलिस बुलाने को ले ब्लेक लिस्टेड कर दिया गया था परिवार 
  • जयपुर फुट यूएसए के चेयरमैन प्रेम भंडारी से स्टीव अरानहा के माध्यम से मिल परिवार ने भारतीय वीजा दिलवाने का किया अनुरोध
  • अमरीका में भारत के राजदूत हर्षवर्धन शिंगला से हस्तक्षेप कर इस परिवार को वीजा दिलवाने की भंडारी ने की अपील 
  • शिंगला के हस्तक्षेप से शिकागो काउन्सलेट ने इस परिवार का नाम गृह मंत्रालय की ब्लेक लिस्ट से निकलवाने की अनुशंसा दिल्ली भेजी
  • गृह मंत्रालय में विशिष्ट सचिव एपी माहेश्वरी  की तत्परता ने परिवार का नाम ब्लेक लिस्ट से निकालकर सूचना शिकागो स्थित काउन्सलेट को भेजी
  • वीजा मिलते ही परिवार साढ़े तीन वर्ष के लंबे इंतजार के बाद मंगलोर पहुंचा तथा अपनी 91 वर्षीय बिस्तर झेल चुकी अंधी मां से मिला

न्यूयॉर्क/जयपुर
एक अंधी बिमार मां से साढे तीन साल तक नहीं मिल पाने का दर्द कैसा होता है ये सोच कर भी मन पसीज जाता है।15 दिन पूर्व जयपुर फुट यूएसए चेयरमैन प्रेम भंडारी जब भारत के लिये रवाना होने वाले थे उसी समय भारतीय मूल के अमरीकी नागरिक स्टीव अरानहा ने अमरीका में रह रहे एक अन्य भारतीय मूल के अमरीकी परिवार की भारत में रह रही 91 वर्षीय अंधी तथा कई बिमारियों से ग्रस्त बिस्तर पकड़ चुकी मां से इस परिवार को मिलवाने की गुहार करते हुये भारतीय वीजा दिलवाने में मदद करने का अनुरोध किया। हुआ यूं कि इस परिवार ने जनवरी 2016 में भारतीय वीजा के लिये शिकागो काउन्सलेट में आवेदन किया ढाई महीने तक परिवार वीजा व अपने पासपोर्ट के लिये काउन्सलेट तथा आउट सोर्सिंग कंपनी के चक्कर काट-काट कर थक कर एक दिन शिकागो काउन्सलेट में अमरीकी पुलिस को बुला लिया परिणाम ये हुआ कि वीजा तो नहीं मिला काउन्सलेट ने इस परिवार को ब्लेक लिस्टेड कर भारतीय गृह मंत्रालय को सूचना दे दी। पिछले साढ़े तीन साल से परिवार ने कई बार शिकागो काउन्सलेट से कई बार गुस्से में पुलिस बुलाने के लिये माफी मांगते हुए वीजा देने की अपील की परन्तु कोई सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार यह परिवार स्टीव अरानहा के मार्फत प्रेम भंडारी तक पहुंचा। भंडारी ने अमरीका में भारत के राजदूत हर्षवर्धन शिंगला से हस्तक्षेप कर इस परिवार को वीजा दिलवाने की अपील की ताकि बेटी, पोती अपनी 91 वर्षीय मां से मिल सके। तुरन्त प्रभाव से शिंगला के हस्तक्षेप से शिकागो काउन्सलेट ने इस परिवार का नाम गृह मंत्रालय की ब्लेक लिस्ट से निकलवाने की अनुशंसा दिल्ली भेजी। इधर भंडारी भी दिल्ली पहुुंच चुके थे उन्होंने शीघ्र ही इस मामले में गृह मंत्रालय में विशिष्ट सचिव एपी माहेश्वरी को सारे कागजात भिजवाते हुये आवश्यक कार्यवाही का आग्रह किया। शीघ्र ही माहेश्वरी की तत्परता ने इनका नाम ब्लेक लिस्ट से निकालकर इसकी सूचना शिकागो स्थित काउन्सलेट को भेजी गई। आवश्यक औपचारिकतायें पूरी कर इस परिवार को भारतीय वीजा जारी कर दिया गया तथा आखिरकार ये परिवार साढ़े तीन वर्ष के लंबे इंतजार के बाद में मंगलोर पहुंचा तथा अपनी 91 वर्षीय बिस्तर झेल चुकी अंधी मां से मिला। भंडारी ने एम्बेसडर शिंगला की मुक्तकंठ से प्रशंसा की, साथ ही एपी माहेश्वरी का भी आभार जताते हुये कहा इस परिवार द्वारा काउन्सलेट में पुलिस बुलाना गलत था, परन्तु ये भी कहा कि काउन्सलेटों को भी अपनी कार्यशैली में सुधार करना चाहिए। ऐसे हालात उत्पन्न न हो इसका ख्याल रखना चाहिए। हालांकि जनवरी से एम्बेसडर शिंगला के वाशिंगटन आने के बाद अमरीका के पांचों काउन्सलेट की कार्यशैली में जरूरी सुधार हो रहा है।

whatsapp mail