मिशन 2019 : महागठबंधन में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय, 20 सीटों पर लड़ेगा राजद

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पटना
महागठबंधन के दल जब सीटों की दावेदारी करते हैं तो ऐसा लगता है कि एनडीए को हराने के लिए राजद अपना घर लुटाने के लिए तैयार बैठा है। सहयोगी दल जितना बड़ा मुंह खोलें, राजद उसमें लोकसभा की सीटें झोंकता जाएगा। लेकिन असल में ऐसा है नहीं है। राजद की झोली में सहयोगी दलों के लिए अधिकतम 20 सीटें हैं। ये सीटें राजद को छोड़ नौ दलों के बीच बंंट सकती हैं। अगर रालोसपा इधर नहीं आती है तो राजद 20 से अधिक सीटों पर उम्मीदवार खड़ा करेगा। तब आठ दलों के बीच बची हुई सीटों का बंटवारा होगा।
महागठबंधन में फिलहाल राजद, कांग्रेस, लोकतांत्रिक जनता दल औैर हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा शामिल हैं। इनके अलावा भाकपा माले, भाकपा, माकपा,सपा और बसपा को स्वाभाविक मित्र मान लिया गया है। तारिक अनवर के इस्तीफे के बाद राज्य में एनसीपी की चुनावी संभावना खत्म हो गई है। बीते लोकसभा चुनाव में एनसीपी भी यूपीए में शामिल थी। विशेष अतिथि के तौर पर रालोसपा का इंतजार किया जा रहा है। सीटों की हिस्सेदारी में उसका दर्जा राजद और कांग्रेस के बाद तीसरे नम्बर पर होगा। बाकी दल एक-दो सीट के लायक माने गए हैं। सहयोगी दलों को यह संकेत दे दिया गया है कि सिर्फ जीतने वाली सीटों की बात करें। 2015 के विधानसभा चुनाव में एनडीए के पार्टनर की तरह अधिक सीटों की मांग कर चुनाव के बाद अपनी फजीहत न कराएं। बेशक राजद ने अगले लोकसभा चुनाव में एनडीए को परास्त करने का मुख्य लक्ष्य रखा है। लेकिन, इस शर्त के साथ कि महागठबंधन के उम्मीदवार कम से कम 20 सीटों पर जीत दर्ज कराएं। यह लक्ष्य हासिल हो गया तो 2020 के विधानसभा चुनाव का रास्ता साफ हो जाएगा।
अपने लिए 20 सीट रखने के बाद राजद की झोली में कांग्रेस के लिए सबसे अधिक आठ सीटें हैं। पिछले चुनाव में कांग्रेस 12 सीटों पर लड़ी थी। तब उसके पास उम्मीदवार नहीं थे। राजद ने दो उम्मीदवार भी दिए। इस बार कांग्रेस को कहा जा सकता है कि जीतने वाली सीटों पर मजबूत उम्मीदवार दीजिए। रालोसपा के लिए चार-पांच सीटें हैं। इनमें से एक झारखंड की हो सकती है। पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि चतरा से चुनाव लडऩा चाहते हैं। अगर रालोसपा महागठबंधन में शामिल नहीं होती है तो सीटों का हिसाब बदल जाएगा। तब राजद के साथ कांग्रेस की सीटें भी बढ़ जाएंगी। शरद यादव की लोकतांत्रिक जनता दल के लिए दो सीटों का प्रस्ताव है। शरद के लिए मधेपुरा और उदय नारायण चौधरी के लिए जमुई। हम के जीतनराम मांझी के लिए गया की सीट आरक्षित है। हम के दूसरे नेता डा। महाचंद्र प्रसाद सिंह का नाम प्रतीक्षा सूची में है। इनके अलावा तीनों वाम दलों के लिए एक-एक सीट का इंतजाम है। बसपा के लिए गोपालगंज या सासाराम की सीट रखी गई है। सपा को झंझारपुर की सीट चाहिए। उस सीट के लिए राजद में पहले से घमासान है। इसलिए सपा को किसी दूसरी सीट पर चुनाव लडऩे के लिए कहा जा सकता है। सन ऑफ मल्लाह मुकेश सहनी के संदेशवाहक इन दिनों दो तरफा चल रहे हैं। वह अगर इस तरफ आए तो उन्हें एक सीट दी जा सकती है। भागवत ने कहा, ' कुछ काम करने में देरी हो जाती है और कुछ काम तेजी से होते हैं वहीं कुछ काम हो ही नहीं पाते क्योंकि सरकार में अनुशासन में ही रहकर कार्य करना पड़ता है ।

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