कमलनाथ के करीबियों के ठिकानों पर दूसरे दिन भी आयकर की छापेमारी

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  • कमलनाथ के करीबियों के 50 ठिकानों पर छापे, अब तक 9 करोड़ रुपए बरामद
  • आयकर अफसरों ने गोवा, दिल्ली, भोपाल और कोलकाता में कार्रवाई की
  • चुनाव आयोग ने कहा- केंद्र सरकार छापेमारी की जानकारी राज्य चुनाव आयुक्त को दे

भोपाल
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के सहयोगियों के ठिकानों पर आयकर विभाग की कार्रवाई सोमवार को दूसरे दिन भी जारी रही। सीएम के निजी सचिव प्रवीण कक्कड़ के करीबी प्रतीक जोशी और अश्विन शर्मा के भोपाल स्थित घरों पर छापेमारी में अब तक 9 करोड़ रुपए नकद मिल चुके हैं। नोटों की गिनती के बाद अफसर पांच बॉक्स और मशीनों के साथ बाहर आए। हालांकि, कुल कितना कैश मिला, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। दूसरी ओर, सोमवार को बैंक से जुड़ी जानकारियां हासिल करने के लिए आयकर टीम कक्कड़ की पत्नी साधना को लेकर आईडीबीआई बैंक पहुंची। दूसरी टीम उनके बेटे सलिल को कक्कड़ फैमिली से जुड़े कई दफ्तर लेकर गई। रविवार को कक्कड़ के इंदौर स्थित घर से 30 लाख की ज्वेलरी और दो लाख कैश मिला था। उनसे रातभर पूछताछ की गई। उनके सीए अनिल गर्ग ने कहा कि आईटी अफसरों ने मुझसे आईटीआर की कॉपी मांगी थीं, मैंने उन्हें पिछले सात साल में भरे गए आईटीआर की कॉपी उपलब्ध कराई। चुनाव आयोग के अफसर विक्रम बत्रा ने कहा कि पैसों के जरिए मतदाता को प्रभावित करने का चलन तेजी से बढ़ा है। खुफिया सूचनाओं के आधार पर प्रवर्तन एजेंसियां कानून के मुताबिक प्रभावी कदम उठा रही हैं। आयोग की सलाह है कि चुनावी समर में कार्रवाई निष्पक्ष होकर करना चाहिए। साथ ही आचार संहिता के दौरान ऐसी कार्रवाई की जानकारी मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को दी जाना चाहिए। इसके लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ने निर्देश जारी किया। यह कार्रवाई सीधे दिल्ली से बुलाई गई सीआरपीएफ टीम की सुरक्षा में तड़के 3 बजे शुरू की गई। मध्यप्रदेश में इंदौर और भोपाल में कुल 6 ठिकानों पर यह कार्रवाई की गई। हालांकि यहां छापे का केंद्र अश्विन शर्मा थे। आशंका जताई जा रही है कि शर्मा ने कांग्रेस सरकार बनने के बाद ट्रांसफर और पोस्टिंग में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि शर्मा ने खुद को भाजपा का कार्यकर्ता बताया। शाम को अश्विन शर्मा के घर छापे के दौरान मध्यप्रदेश पुलिस और सीआरपीएफ के बीच टकराव की स्थिति बन गई। सीआरपीएफ का कहना है कि मध्य प्रदेश पुलिस हमें काम नहीं करने दे रही। भोपाल में छापे का मुख्य केंद्र अश्विन शर्मा ही रहा। सूत्रों के अनुसार उसके डेढ़ दर्जन से अधिक आईएएस अधिकारियों से बेहद नजदीकी संबंध थे। विभाग इन अफसरों के साथ वॉट्सऐप चैट की डिटेल खंगाल रहा है।

आर्म्स डीलर हैं प्रतीक जोशी और अश्विन शर्मा

दोनों आपस में रिश्तेदार हैं। अश्विन का ब्यूरोक्रेट्स में खासा दखल है। एनजीओ समेत कई काम हैं। अफसरों के कमरों में बेधड़क आना और जाना भी है। ऐसा कहा जाता है कि ट्रांसफर-पोस्टिंग में भी ये सक्रिय रहते हैं। प्रवीण कक्कड़ से इनका जुड़ाव है। अश्विन को शुरूआती दौर में मध्यप्रदेश के दो अफसरों ने मदद की और फिर यह दायरा बढ़ता गया। सचिवालय (वल्लभ भवन) के एक बड़े अफसर के कहने पर 31 दिसंबर को अश्विन ने फेसबुक प्रोफाइल डिलीट कर दी। 

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