आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने दिया इस्तीफा

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मुंबई
भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने अपने निर्धारित कार्यकाल के पूरा होने से छह महीने पहले ही अपना इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने 2017 में आईबीआई ज्वॉइन किया था। विरल आचार्य का इस्तीफा देना आईबीआई के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। फिलहाल उनके इस फैसले को लेकर यह कहा जा रहा है कि उन्होंने कुछ महीनों से आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास के फैसलों से अलग अपना विचार रखना शुरू कर दिया था जिसके बाद एक टकराव की स्थिति पैदा हो गई थी। हालांकि उन्होंने इसे अपना निजी फैसला बताया है। वर्तमान गवर्नर शक्तिकांत दास से भी से भी उनके टकराव की खबरें आती रही हैं। वह लगातार उनके नीतियों की आलोचना करते रहे हैं। फिलहाल विरल आचार्य का इस्तीफा सरकार के लिए टेंशन बढ़ाने वाली है। भारतीय रिजर्व बैंक को बड़ा झटका देते हुए डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने अपना कार्यकाल पूरा होने से छह महीने पहले ही इस्तीफा दे दिया है। वह मौद्रिक नीति विभाग के प्रमुख थे। मौद्रिक नीति विभाग ही है जो देश में ब्याज दरों को तय करने में अहम भूमिका निभाता है। पिछले छह महीने में रिजर्व बैंक से इस्तीफा देने वाले आचार्य दूसरे बड़े पदाधिकारी हैं। इससे पहले दिसंबर 2018 में आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल ने सरकार के साथ मतभेदों के कारण कार्यकाल पूरा होने से नौ महीने पहले ही इस्तीफा दे दिया था। इस खबर के आते ही क्रक्चढ्ढ ने कहा कि कुछ सप्ताह पहले आचार्य ने पत्र लिखकर सूचित किया था कि अपरिहार्य निजी कारणों से 23 जुलाई, 2019 के बाद वह डिप्टी गवर्नर के अपने कार्यकाल को जारी रखने में असमर्थ हैं। हालांकि उनके इस्तीफे पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया गया है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली नियुक्ति समिति ने आचार्य की नियुक्ति की थी, इसलिए उनका त्यागपत्र भी वही समिति स्वीकार करेगी।

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