मसूद अजहर पर नरम पड़ा चीन, कहा- भारत की चिंता समझते हैं, सुलझा लेंगे मसला

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नई दिल्ली
जैश-ए-मोहम्मद सरगना आतंकी मसूद अजहर का नाम वैश्विक आतंकियों की सूची में डालने के मुद्दे पर चीन का रुख थोड़ा नरम पड़ता दिख रहा है। भारत में चीन के राजदूत लिओ झेंगहुई ने कहा है कि उनका देश भारत की चिंताओं का समझता है और जल्द ही इस मुद्दे को सुलझा लिया जाएगा। समाचार एजेंसी के अनुसार लिओ ने कहा कि यह सिर्फ तकनीकी रोक है, जिसका मतलब है कि इस मुद्दे पर अभी और विचार किया जाएगा। आप मेरा यकीन करें इसे सुलझा लिया जाएगा। लिओ ने कहा कि मसूद अजहर के संबंध में हम भारत की चिंता समझते हैं। हमारा मानना है कि यह मुद्दा सुलझा लिया जाएगा। चीनी दूतावास में रविवार को होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर चीनी राजदूत ने कहा कि मसूद अजहर मामले पर बातचीत की जा रही है। मेरा विश्वास करें, इस मामले का जल्द ही हल हो जाएगा। पिछले साल वुहान सम्मेलन के बाद दोनों देशों के बीच सहयोग सही दिशा में बढ़ा है। हम इस सहयोग से संतुष्ट हैं और भविष्य को लेकर आशावादी हैं। मसूद अजहर के मामले पर चीन का कहना है कि वह बिना सबूतों के कार्रवाई के खिलाफ है। इस पर अमेरिका ने चीन से अनुरोध किया था कि वह समझदारी से काम लें, क्योंकि भारत-पाक में शांति के लिए मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करना जरूरी है। पाक में चीन सीपैक में 55 बिलियन डॉलर (3.8 लाख करोड़ रु.) का निवेश करेगा। इसके अलावा कई प्रोजेक्ट्स में 46 बिलियन डॉलर (3.2 लाख करोड़ रु.) खर्च कर चुका है। पाक में पंजीकृत विदेशी कंपनियों में सबसे ज्यादा 77 चीन की हैं। भारत को घरेलू मोर्चे पर घेरे रखना: चीन भारत को अपना सबसे बड़ा आर्थिक प्रतिद्वंद्वी मानता है। चीन चाहता है कि भारत द. एशिया के अहम बिंदुओं पर ध्यान न देकर घरेलू समस्याओं में उलझा रहे। वह मसूद के खिलाफ जाता तो भारत मजबूत दिखता। चीन में उईगर मुस्लिमों पर कई तरह के प्रतिबंध हैं। वे खुले में नमाज तक नहीं पढ़ पाते। इस्लामिक सहयोग संगठन के देशों में से सिर्फ पाक ही इन प्रतिबंधों को सही मानता है। भारत-अमेरिका के अच्छे संबंध चीन के खिलाफ जाते हैं। इसलिए चीन ने मसूद अजहर को हथियार बना लिया है। जैसा भारत अजहर मसूद को समझता है, ठीक वैसे ही चीन दलाई लामा को मानता है।

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