पहाड़ों की खुदाई अब जघन्य अपराध

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अरावली में पर्यावरण से छेड़छाड़ पर एनजीटी हुआ सख्त

नई दिल्ली
पर्यावरण संरक्षण को लेकर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) काफी सख्त है। एनजीटी इसके लिए प्रत्येक राज्य को नए दिशा-निर्देश भी जारी कर रहा है। इसी कड़ी में राजस्थान की अरावली पर्वतमाला में खुदाई के खिलाफ कड़ा रुख दिखाते हुए एनजीटी ने इसे एक अपराध करार दिया है।

एनजीटी न्यायलय में पेश हुए प्रदेश के मुख्य सचिव
राजस्थान के मुख्य सचिव डीबी गुप्ता समेत आधा दर्जन विभागों के अधिकारी मंगलवार को एनजीटी न्यायालय में पेश हुए। डीबी गुप्ता ने एनजीटी न्यायालय में 12 बिंदुओं पर कार्यपालना की रिपोर्ट सौंपी। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने कहा कि सभी धर्मों के लोग साथ रहते हैं, उनके लिये पर्यावरण ही भगवान है। सरकार को भी इस दिशा में काम करना चाहिए, ताकि लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़े। कोर्ट ने हर जिले में 3 गांवों को चुनकर 6 महीने में पहले चरण का काम करने को कहा है। मुख्य सचिव की ओर से 3 बड़े शहरों में ये काम करवाने की बात कही गई थी, जिससे कोर्ट ने इनकार दिया।

ग्राउंड वाटर लेवल खराब
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रदेश को गंदे नाले की समस्या सुलझाने के लिये ट्रीटेड वॉटर प्लांट लगाने का भी सुझाव दिया। कोर्ट ने कहा कि राजस्थान में ग्राउंड वाटर के हालात बहुत खराब हैं। बाड़मेर समेत कई जिलों में जिस तरह धड़ल्ले से खुदाई का काम हो रहा है, उससे ऐसा लगता है कि सरकार इस ओर जानबूझकर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। इस पर सरकार की ओर से जवाबी कार्रवाई में एफसीआई की रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है। साथ ही स्वावलंबन अभियान का भी हवाला दिया गया। पाली और बालोतरा में आरओ प्लांट लगाने का भी तर्क दिया गया है।

एनजीटी का अल्टीमेटम
सुनवाई के दौरान एनजीटी ने प्रदेश में शुद्ध वातावरण, उद्योगों के प्रदूषण को कम करने और अरावली में अवैध खनन को रोकने के लिए निर्देश दिए हैं। एनजीटी ने सांभर लेक को पुनर्जीवित करने की भी नसीहत प्रदेश सरकार को दी है। इसके अलावा तीन मॉडल टाउन, 3 मॉडल सिटी और तीन मॉडल गांव बनाने के आदेश दिए गए हैं। न्यायाधीश ने कहा कि जयपुर, उदयपुर और सीकर को मॉडल सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और पुष्कर को मॉडल टाउन के रूप में विकसित किया जाएगा। एनजीटी ने दिशा निर्देश जारी करते हुए कहा कि एक महीने में तीन गांवों का भी चयन इसके अंतर्गत किया जाएगा। 6 महीने में पहले चरण का कार्य पूरा कर एनजीटी को रिपोर्ट पेश की जाएगी।

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