प्रदूषण पर हाई कोर्ट ने की दिल्ली सरकार की खिंचाई

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नई दिल्ली
राजधानी में एयर इमर्जेंसी पर हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों और संबंधित प्राधिकरणों की जमकर खिंचाई की और कहा कि प्रदूषण से लडऩे के उपायों को लागू करने की इच्छाशक्ति में कमी है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर बना हुआ है और इस वजह से दिल्ली-एनसीआर के स्कूलों को 15 नवंबर तक बंद कर दिया गया है। हाईकोर्ट ने कहा कि आम जनता सहित सभी हित धारकों से इससे लडऩे में अग्रणिय सक्रिय भूमिका निभानी पड़ेगी। कोर्ट ने कहा, समस्या लागू करने में है, इससे (प्रदूषण) से लडऩे के उपायों में कमी नहीं है। इसे लागू करने की इच्छाशक्ति की पूरी कमी है और अगर हम दिल्ली को प्रदूषण मुक्त देखना चाहते हैं तो आम नागरिकों सहित सभी हितधारकों को इसमें अग्र-सक्रिय भूमिका निभानी पड़ेगी। 
दिल्ली में वायु प्रदूषण अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में गंभीर स्तर पर पहुंच गया और उसके बाद से लगातार खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। राजधानी की सरकार ने इससे लडऩे के लिए ऑड-ईवन योजना लागू की है और ऐसा दावा कर रही है कि इससे पोल्यूशन से लडऩे में मदद मिली है। राजधानी में पोल्यूशन बढऩे की वजहों में से एक पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना भी है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इस समस्या पर संज्ञान लेते हुए सभी संबंधित राज्यों (हरियाणा, पंजाब और यूपी) को फटकार लगाई है। साथ ही वहां के मुख्य सचिवों को निर्देश दिए हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि पराली जलने की एक भी घटना सामने न आए। उन्होंने गरीब किसानों को प्रति क्विंटल 100 रुपये प्रोत्साहन राशि देने के भी निर्देश दिए हैं, ताकि वे पराली न जलाएं। उधर, प्रदूषण की स्थिति पर नजर रखने वाले पैनल ईपीसीए ने बुधवार को 15 नवंबर तक दिल्ली-एनसीआर में स्कूल बंद करने के निर्देश दिए। इस अवधि में फरीदाबाद, गुडग़ांव, गाजियाबाद, नोएडा, बहादुरगढ़, भिवाड़ी, ग्रेटर नोएडा, सोनीपत और पानीपत में कोयला और अन्य ईंधन आधारित उद्योग भी बंद रखने के निर्देश जारी किए गए हैं।

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