पीएम आज तेल कंपनियों के साथ करेंगे बैठक 

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नई दिल्ली 
ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध और कीमतों में आए दिन बढ़ोत्तरी से बदलते ऊर्जा परिदृश्य पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को तेल कंपनियों के शीर्ष अफसरों के साथ मंथन करेंगे। इस बैठक में तेल और गैस उत्पादन और अन्वेषण में निवेश बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार विमर्श किया जाएगा। ऊर्जा क्षेत्र में सुधार के लिए होने वाली यह तीसरी बैठक है। पांच जनवरी 2016 में हुई पहली बैठक में प्राकृतिक गैस की कीमतों को बढ़ाने का सुझाव मिला था जिस पर साल भर बाद सरकार ने उस प्राकृतिक गैस की कीमत बढ़ाने की मंजूरी दी थी जिसके उत्पादन में लागत ज्यादा आती है। वहीं बीते साल अक्तूबर में हुई दूसरी बैठक में ओएनजीसी और ऑयल इंडिया लिमिटेड के स्रोतों से तेल और गैस उत्पादन के लिए विदेशी और निजी कंपनियों को बराबर अवसर दिए जाने का सुझाव मिला था। यह सुझाव ओएनजीसी और ओआईएल के पुरजोर विरोध के चलते कार्यान्वित नहीं हो पाया था। दरअसल प्रधानमंत्री ने वर्ष 2014 में देश में उत्पादित होने वाले तेल और गैस पर निर्भरता को वर्ष 2022 तक दस फीसदी से 67 फीसदी बढ़ाने का लक्ष्य रखा था। इस लिए घरेलू गैस और तेल उत्पादन में निजी निवेश को बढ़ाने का विचार बनाया था। मालूम रहे कि बीते चार साल में घरेलू उत्पादन की दर नहीं बढ़ी है जबकि मांग हर साल 56 फीसदी बढ़ती रही है। अब हालत यह है कि देश गैस की जरूरत को पूरा करने के लिए 83 फीसदी तक निर्यात पर निर्भर है। सोमवार को होने वाली बैठक में सऊदी के तेल मंत्री खालिद ए अल फैयाह, टोटल कंपनी के प्रमुख पैट्रिक फैयाने, ब्रिटिश कंपनी बीपी के सीईओ बॉब डुडले, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और वेदांता के मुखिया अनिल अग्रवाल के हिस्सा लेने की संभावना है। 
 

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