पिनाकी चंद्र घोष बने पहले लोकपाल, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

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नई दिल्ली
देश को बहुप्रतीक्षित लोकपाल मिल गया है। सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश पिनाकी चंद्र घोष भारत के पहले लोकपाल होंगे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इसकी मंजूरी दे दी है। लोकपाल की चयन समिति ने जस्टिस दिलीप बी भोसले, जस्टिस पी के मोहंती, जस्टिस अभिलाषा कुमारी और जस्टिस एके त्रिपाठी को न्यायिक सदस्य और दिनेश कुमार जैन, अर्चना रामासुंदरम, महेन्द्र सिंह, और डॉ आईपी गौतम को सदस्य बनाया है।जस्टिस घोष फिलहाल राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य हैं। देश के लिए ऐतिहासिक समय साकार होने वाला है, जब भ्रष्टाचार पर निगाह रखने वाली सर्वोच्च संस्था लोकपाल की नियुक्ति होगी। इसकी चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। लोकपाल कानून के तहत इसकी जांच के दायरे में प्रधानमंत्री भी आएंगे। लोकपाल सीबीआइ समेत सभी जांच एजेंसियों को निर्देश दे सकता है।केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कर सकेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यों की चयन समिति की बैठक विगत शुक्रवार यानी 15 मार्च को हुई थी जिसमें लोकपाल और उसके चार न्यायिक व चार गैर न्यायिक कुल आठ सदस्यों का चयन किया गया। पीएम समेत इस चयन समिति में कुल पांच सदस्य हैं।

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