सुखराम और उनके पोते आश्रय कांग्रेस में शामिल, वीरभद्र पर साधा निशाना

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नई दिल्ली
पूर्व केंद्रीय संचार मंत्री पंडित सुखराम व उनके बड़े पोते आश्रय शर्मा कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। दिल्ली में उन्होंने पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली। मंडी संसदीय क्षेत्र से आश्रय शर्मा कांग्रेस के उम्मीदवार हो सकते हैं। अनिल शर्मा, जयराम सरकार में ऊर्जा मंत्री हैं। अनिल शर्मा शाम तक मंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। पंडित सुखराम बोले मैं राहुल गांधी से दो माह पहले मिला व इस बात से प्रभावित हुआ कि हमारे राजनीतिक नहीं पारिवारिक रिश्ते हैं। मैं अपने घर आया हूं, पूरा जीवन कांग्रेस में गुजरा है। अब जिंदगी के इस मोड़ पर किसी से द्वेष नहीं है। उन्होंने वीरभद्र पर निशाना साधा। उन्होंने कहा वीरभद्र सिंह ने मेरी मजबूरी का फायदा उठाया। अब पोता कांग्रेस को दिया व विकास की राह पर अग्रसर होगा। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधा कि पार्टी किस मुंह से बोल रही है कि मैं भाजपा का सदस्य नहीं रहा। ताजा घटनाक्रम को लेकर अनिल शर्मा ने सोमवार सुबह मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से परिधि गृह मंडी में भेंट की थी। उन्हें मौजूद राजनीतिक घटनाक्रम से अवगत करवाया। अनिल शर्मा ने मुख्यमंत्री को बताया बाप व बेटे के इस कदम से वह धर्मसंकट में पड़ गए हैं। अनिल शर्मा 2017 में विधानसभा चुनावों की घोषणा होने के बाद वीरभद्र मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के बाद भाजपा में शामिल हुए थे। अनिल को भाजपा में शामिल करने में पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल, पंडित सुखराम व आश्रय शर्मा की अहम भूमिका रही थी। सजायाफ्ता होने की वजह से भाजपा ने सुखराम को पार्टी की सदस्यता नहीं दी थी। सिर्फ अनिल शर्मा ने ही भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। आश्रय शर्मा व पंडित सुखराम टिकट को लेकर कई माह से हायतौबा मचा रहे थे। दोनों ने कई दिनों से दिल्ली में डेरा डाल रखा था। मंडी संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के दिग्गज चुनाव लडऩे के नाम से कन्नी काट रहे थे। वीरभद्र व कौल की न के बाद पार्टी के पास कोई मजबूत विकल्प नहीं बचा था। कांग्रेस पार्टी ने पंडित सुखराम के समक्ष अनिल शर्मा की घर वापसी की शर्त रखी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कौल सिंह ठाकुर का कहना है कि पंडित सुखराम परिवार की घर वापसी पर किसी को कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते अनिल शर्मा जयराम कैबिनेट से इस्तीफा दें। पार्टी आश्रय शर्मा को मंडी से टिकट देने को तैयार है। मेरे व वीरभद्र सिंह के पास चुनाव लडऩे के लिए इतना पैसा नहीं है।

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