कौन हैं राम वी. सुतार, जिन्होंने बनाया विश्व का सबसे ऊंचा सरदार

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नई दिल्ली 
नोएडा स्थित अपने विशाल स्टूडियो में राम वी. सुतार जैसे ही एक ओर अपना आसन ग्रहण करते हैं, वे जद्दोजहद का प्रतीक दिखाई देते हैं। कला के कई वादों से कई दशकों तक उनकी लड़ाई लगभग एकाकी ही रही, लेकिन 93 वर्ष का यह मूर्तिशिल्पकार आकार की दुनिया में अपनी विशालतम मौजूदगी को बनाए रखने के लिए आज भी कटिबद्ध दिखता है। कभी गांधी के जरिए तो कभी अंबेडकर के साथ। कभी सरदार पटेल के माध्यम से तो कभी दीन दयाल उपाध्याय के साथ। ढेर सारे महापुरुष, ढेर सारे पौराणिक पात्र, अनगिनत इतिहास पुरुष और दर्जनों विज्ञान पुरुष... लेकिन आकारों को रचने, ढालने और उन्हें स्थापित करने की इस यात्रा को, इतिहास के जिस नायक ने विश्वयात्रा बनाने में सबसे ज्यादा मदद की, वह गांधी ही थे और आज भी हैं। हालांकि अब वह पूरे विश्व में सरदार पटेल की प्रतिमा के लिए जाने जाएंगे। राम वी. सुतार ही वह शख्स हैं जिन्होंने विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टेच्यू ऑफ यूनिटी बनाई है। आज से सभी उन्हें इस विशाल प्रतिमा के लिए जानेंगे।  
हंसते हुए कहते हैं, आज भी गांधी मेरे लिए एक सपने की तरह हैं। उनसे मिलना लगभग एक सदी से मिलने जैसा है। 1925 में महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव गोंडूर में पैदा हुए राम वी. सुतार ने स्कूल के दिनों में ही पहली बार जिस गांधी को बनाया था, वह हंसते हुए गांधी थे। पुरानी बात जब खुलती है तो उनके चेहरे पर एक आत्मविश्वास उतर आता है- मेरे पास गांधी की एक तस्वीर थी। उसमें वे हंस रहे थे। मेरे एक टीचर को गांधी का बस्ट चाहिए था। मैंने बनाया। फिर उस बस्ट की एक और कॉपी भी बनाई। उस समय मुझे 300 रुपये मिले थे। स्कूल के बाद जब वे मुंबई के जे.जे.स्कूल ऑफ आर्ट में मूर्तिशिल्प के छात्र हुए तो उनकी कला की दुनिया बड़ी होती गई।
 

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