कांग्रेस के पास भी हो एक अमित शाह

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श्रीनगर
जम्मू कश्मीर में लोकसभा चुनाव के नतीजों के रुझान में महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली पीडीपी का सूपड़ा साफ हो गया है। दक्षिण कश्मीर की अनंतनाग सीट जहां से महबूबा मुफ्ती खुद मैदान में थीं वह भी अपनी सीट नहीं बचा पाईं। वह तीसरे स्थान पर रही हैं।   पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने हार स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी। साथ ही ट्वीट कर कहा, ऐतिहासिक जनादेश प्राप्त करने के लिए नरेंद्र मोदी जी को बधाई। आज का दिन बीजेपी और उसके सहयोगियों का है। अब वक्त आ गया है कि कांग्रेस के पास भी एक अमित शाह हो। पीडीपी की स्थिति इतनी खराब होगी इसका अंदाजा संभवत: खुद पार्टी को भी नहीं था। वर्ष 2014 के चुनाव में अनंतनाग सीट से महबूबा मुफ्ती खुद जीती थीं जबकि बारामुला सीट से मुजफ्फर बेग जीते थे। यानि दो लोकसभा सीटों पर पीडीपी का कब्जा था। विधानसभा चुनावों के बाद राज्य में सरकार बनाने के लिए पीडीपी ने भारतीय जनता पार्टी से हाथ मिला लिया। विशुद्ध कश्मीर की राजनीति के लिए जानी जाने वाली पीडीपी के लिए यह न सिर्फ सियासी जमीं पर सबसे बड़ा फैसला था। लेकिन राष्ट्रीय राजनीति से जुदा सोच वाले उसके समर्थकों को संभवत: यह फैसला रास नहीं आ रहा था। इसका अहसास महबूबा को थोड़ा देर से हुआ और 2018 में जब वह सरकार से अलग हुईं तब तक काफी देर हो चुकी थी। उनकी सियासी जमीन हाथ से निकल चुकी थी। लोकसभा चुनावों की घोषणा के बाद महबूबा ने जमीनी हकीकत टटोली तो उन्हें इस बात का इल्म हो चुका था कि बाजी उनके हाथ से निकल चुकी है। यही कारण है कि लोकसभा चुनावों के लिए प्रचार के दौरान उन्होंने हर भाषण में उन्हीं बातों की चर्चा और समर्थन किया जो उनकी पार्टी की विचार धारा को पसंद आती हो। अपने लगभग हर भाषण में वह पाकिस्तान की तरफदारी करती नजर आईं। लेकिन उनका कोई भी दांव समर्थकों को लुभा नहीं पाया। यही कारण है कि वह अपनी सीट भी नहीं बचा पायीं। कश्मीर के चुनाव में इतनी बदतर स्थिति पीडीपी की कभी नहीं रही।  

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