सरकार के फैसले पर हुर्रियत नेता का बयान, अलगाववादी नेताओं ने कभी सुरक्षा नहीं मांगी

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श्रीनगर
जम्मू और कश्मीर के पुलवामा में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद सरकार एक्शन मोड़ में आ गई है। यही कारण है कि सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए अलगाववादी नेता मीरवाइज फारूक समेत हुर्रियत के पांच नेताओं की सुरक्षा वापस ले ली है। वहीं, हुर्रियत कांफ्रेंस के नेताओं ने सरकार के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने कभी सुरक्षा नहीं मांगी थी। अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक के नेतृत्व वाले हुर्रियत कांफ्रेस ने एक बयान में कहा कि सरकार ने खुद ही अलगाववादी नेताओं को सुरक्षा मुहैया कराने का फैसला लिया, जिसकी कभी मांग नहीं की गई। आपको बता दें कि सरकार ने जिन नेताओं की सुरक्षा हटाने का फैसला लिया है, उनमें अब्दुल गनी बट्ट, बिलाल लोन, हाशमी कुरैशी और शब्बीर शाह शामिल हैं। इसके साथ ही सरकार ने इन नेताओं को मिलने वाली सभी सरकारी सुविधाएं भी छीन ली हैं। बयान में कहा गया, सुरक्षा वापस लेने के फैसले से न तो अलगाववादी नेताओं के रुख में बदलाव आएगा न हीं इससे जमीनी हालात पर कोई असर पड़ेगा। जानकारी के अनुसार आज शाम तक इन नेताओं को मिलीं सभी सुरक्षा और सरकारी सुविधाएं वापस ले ली जाएंगी। वहीं, सरकार की ओर से उठाए गए इस कदम के बाद अब किसी भी अलगाववादी नेता को सरकारी खर्च पर कोई सुरक्षा मुहैया नहीं कराई जाएगी। इसके साथ ही इन नेताओं को राज्य या केन्द्र सरकार की ओर से दी जाने वाली हर तरह की सुविधा या लाभ को भी वापस लिया जाएगा।

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