अगले लोकसभा चुनावों में बुआ-भतीजा का साथ, कमजोर कर देगा हाथ!

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लखनऊ
2019 में सपा-बसपा में गठबंधन की तैयारी जोरों पर (अखिलेश और मायावती फाइल फोटो में) जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे मोदी सरकार के खिलाफ महागठबंधन की कवायदों का गुब्बार फूटने की खबर आने लगी है। लोकसभा चुनाव से पहले सपा-बसपा के बीच गठबंधन की अटकलों से बिहार की सियासत से अब यूपी की सियासत पर सबकी नजरें टिक गई हैं। सूत्रों की मानें तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस की महागठबंधन की कवायदों को झटका देने का मन बना लिया है और कांग्रेस को छोड़-छोड़ एक साथ साथ चुनाव लडऩे की तैयारी कर चुके हैं। सूत्रों से मिली जानकारी की मानें तो मायावती और अखिलेश यादव इस साल होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सीट-बंटवारे के फॉर्मूले को अंतिम रूप देने के करीब पहुंच गए हैं और बस सिर्फ ऐलान की देरी है। सूत्रों का दावा है कि उत्तर प्रदेश की ये दोनों बड़ी पार्टियां 37-37 लोकसभा सीटों पर साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगी। बता दें कि उत्तर प्रदेश में लोकसभा की कुल 80 सीटें हैं। यूपी की सियासी गलियाओं में चर्चा इस बात पर भी है कि बसपा-सपा गठबंधन में अमेठी और रायबरेली की सीटें छोड़ दी जाएंगी और वहां किसी भी उम्मीदवार को नहीं उतारा जाएगा। इसके बाद जो सीटें बच रही हैं उससे राष्ट्रीय लोकदल और अन्य छोटी पार्टियों के लिए छोड़ा जायेगा। यानी सपा और बसपा के बीच गठबंधन की बात सही साबित होती है तो इसका मतलब है कि कांग्रेस इस गठबंधन का हिस्सा नहीं होगी और यूपी की अन्य क्षेत्रीय पार्टियों को जोडऩे की सपा-बसपा पूरजोर कोशिश करेगी। इस तरह से देखा जाए तो सपा-बसपा का संगम होता है तो कांग्रेस को बड़ा झटका तो होगा। साथ ही साथ बीजेपी के लिए भी किसी बड़े झटके से कम नहीं होगी। 

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