महाराष्ट्र में सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू: पवार

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  • मुलाकात के लिए राज्यपाल से वक्त मांगा
  • शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस के बीच हर चार विधायकों पर एक मंत्री होने पर सहमति बनी

नई दिल्ली
महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार बनाने के लिए शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस की समन्वय समिति की पहली बैठक में न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) की रूपरेखा तय हो चुकी है। शुक्रवार को शरद पवार ने कहा- सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू, 5 साल पूरे करेंगे। हमने मुलाकात के लिए राज्यपाल से शनिवार दोपहर 3 बजे का वक्त मांगा है। पवार ने कहा कि पार्टियां स्थिर सरकार चाहती हैं, जिनका मकसद विकास करना होगा। मध्यावधि चुनाव की कोई गुंजाइश नहीं है। यह सरकार बनेगी और अपना पांच सालों का कार्यकाल पूरा करेगी। हम सभी यह सुनिश्चित करते हैं कि सरकार पांच साल तक चलेगी। हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस का गठबंधन 6 महीने से ज्यादा नहीं चलेगा। इस पर पूछे गए सवाल के जवाब में पवार ने कहा मैं देवेंद्र को कुछ सालों से जानता हूं। मगर मुझे इस बात का पता नहीं था कि वे एक ज्योतिषी भी हैं। 

भाजपा के बिना स्थिर सरकार संभव नहीं: पाटिल
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने शुक्रवार को कहा कि भाजपा ही महाराष्ट्र की सबसे बड़ी पार्टी है और उसके बिना स्थिर सरकार बनाना संभव नहीं है। चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि हमारे पास सबसे ज्यादा संख्या है। देवेंद्र फडणवीस ने पार्टी के नेताओं के समक्ष यह विश्वास व्यक्त किया है कि 119 विधायकों के साथ हम राज्य में भाजपा सरकार बनाएंगे।  हम राज्य को एक स्थिर सरकार देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भाजपा के बिना महाराष्ट्र में कोई सरकार नहीं हो सकती।

मुख्यमंत्री पद के मुद्दे पर ही शिवसेना ने भाजपा से गठबंधन तोड़ा: मलिक                                                                          मलिक ने कहा- ''मुख्यमंत्री पद के मुद्दे पर ही शिवसेना ने भाजपा से गठबंधन तोड़ा है। इसलिए उसके सम्मान और स्वाभिमान को जीवित रखना हमारी जिम्मेदारी है। महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए सभी दलों को साथ आना होगा। लेकिन कांग्रेस इससे कुछ हिचकिचा रही है। साझा कार्यक्रम का ड्राफ्ट सोनिया गांधी को भेजा गया है। अगर वो साथ नहीं आएगी तो सरकार नहीं बनाएंगे। राष्ट्रपति शासन लगने से प्रशासनिक व्यवस्थाएं पूरी तरह ठप हो गई हैं। राज्य के किसान परेशान हैं, उन्हें फसल की बुआई करनी है। तीनों पार्टियों ने इस मुद्दे पर राष्ट्रपति से मुलाकात करने की योजना बनाई है।''

शिवसेना के सामने रखी कट्?टरपंथी छवि से बाहर आने की शर्त:                                                                                        कांग्रेस और राकांपा ने शिवसेना के सामने कट्टरपंथी हिंदूवादी पार्टी की छवि से बाहर आने की शर्त रखी है। कांग्रेस को शिवसेना को समर्थन देने से सबसे ज्यादा हिचक उसकी इसी छवि को लेकर है। वहीं राकांपा प्रमुख शरद पवार और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी 17 नवंबर को दिल्ली में शिवसेना के साथ गठबंधन सरकार बनाने के मुद्दे पर चर्चा करेंगे। तीनों दलों के बीच सहमति बनी है कि प्रत्येक पार्टी के हर चार विधायकों पर एक मंत्री होगा। यह फॉर्मूला लगभग तय है। शिवसेना के 56 विधायक हैं, उन्हें सात अन्य विधायकों का समर्थन है यानी शिवसेना के कुल 63 विधायक हैं। ऐसे में उसके 15 या 16 मंत्री होंगे। राकांपा के 11 या 12 मंत्री होंगे। वहीं कांग्रेस के 44 विधायक हैं, तो उसे खाते में 11 मंत्री होंगे।

ड्राफ्ट में किसानों का मुद्दा प्रमुखता से शामिल
कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने बताया कि ड्राफ्ट में किसानों का मुद्दा प्रमुखता से शामिल है। केवल एक-दो मुद्दों पर चर्चा होनी बाकी है। नई सरकार में मुख्यमंत्री पद शिवसेना के पास ही रहेगा। सूत्रों के मुताबिक, राकांपा उपमुख्यमंत्री पद पर मान गई है। बैठक में राकांपा प्रदेश प्रमुख जयंत पाटिल, राकांपा नेता छगन भुजबल और पार्टी के प्रवक्ता नवाब मलिक, कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण, मणिकराव ठाकरे, विजय वडेट्टीवर, शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे और सुभाष देसाई शामिल हुए।

महाराष्ट्र के हितों का ध्यान रखा जाएगा: शिवसेना
इससे पहले शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने कहा था कि साझा कार्यक्रम में महाराष्ट्र के हितों को ध्यान में रखा जाएगा। पूरे 5 साल शिवसेना का ही मुख्यमंत्री होगा। वहीं, राकांपा नेता नवाब मलिक ने कहा कि शिवसेना के साथ आने में कांग्रेस कुछ हिचकिचा रही है। ड्राफ्ट की कॉपी सोनिया गांधी को भेजी है, अगर कांग्रेस साथ नहीं आई तो सरकार नहीं बनाएंगे।

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