अन्तर्राज्यीय समझौतों के अनुरूप प्रदेश को पूरा पानी मिले : गहलोत

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नई दिल्ली
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को चण्डीगढ़ में आयोजित उार-क्षेत्रीय परिषद् की 29वीं बैठक में राजस्थान से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर मजबूती से अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि अंतर्राज्यीय जल समझौतों के अनुरूप प्रदेश को उसके हिस्से का पूरा पानी मिले। मुख्यमंत्री नेे कहा कि पंजाब सरकार ने राजस्थान के साथ समझौतों पर सकारात्मक रूख अपनाया है। अब हरियाणा सरकार भी राजस्थान के हितों का ध्यान रखे। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि रावी ब्यास नदी के जल में राजस्थान की शेष हिस्सेदारी का 0.60 एमएएफ जल छोड़े जाने, हरिके पर राजस्थान की नहरों में प्रदूषित जल का प्रवाह रोकने तथा हरिके पर इंदिरा गांधी फीडर के हैड रेगुलेटर की क्षमता बढ़ाने सहित अन्य मुद्दों पर पंजाब सरकार से बीते दिनों द्विपक्षीय वार्ता हुई थी। इसमें बनी सहमति के अनुसार पंजाब और राजस्थान लाभप्रद समझौते की ओर अग्रसर हैं। नहरों में प्रदूषित जल का प्रवाह रोकने के लिए पंजाब सरकार ने काम भी शुरू कर दिया है। 

प्रदेश के 1376 गांवों को बैंकिंग सेवाओं से जोडें
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृहमंत्री से आग्रह किया कि सीधी बैंकिंग सेवा से वंचित प्रदेश के एक हजार 376 गांवों में भारत सरकार बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध करवाए। उन्होंने कहा कि ऐसे गांव जहां 5 किलोमीटर के दायरे में कोई भी बैंक शाखा नहीं है, वहां बैंकों की शाखाएं खोली जाएं ताकि लोग स्थानीय स्तर पर बैंकिंग सेवाएं प्राप्त कर वित्तीय समावेशन की दिशा में आगे बढ़ सकें। 

जीएसटी मुआवजा 5 साल और मिले 
मुख्यमंत्री ने जीएसटी के बाद राज्यों की कमजोर आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि जीएसटी मुआवजे की अवधि 5 साल और बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बड़े अरसे से लंबित सीएसटी मुआवजा भी राज्यों की तरलता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। इसके लिए सीएसटी दर पहले की तरह 4 प्रतिशत की जाए और मुआवजा शीघ्र दिया जाए।

केंद्र प्रवर्तित योजनाओं में हिस्सा राशि घटाना अनुचित
गहलोत ने बैठक में कहा कि केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं में केन्द्र सरकार लगातार अपनी हिस्सा राशि घटाती जा रही है। राज्यों पर इससे आर्थिक भार और बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र प्रवर्तित योजनाओं में वर्ष 2011-12 तक केंद्र की हिस्सा राशि 75 प्रतिशत और इससे अधिक हुआ करती थी, लेकिन वर्तमान केंद्र सरकार ने इसे कम करते हुए बराबर की हिस्सेदारी तक ला दिया है। इसके कारण राज्य आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। 

केन्द्रीय करों से राज्य के हिस्से में हो रही निरंतर कटौती
मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय करों में राज्य की हिस्सा राशि में निरंतर हो रही कटौती पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने फरवरी में प्रस्तुत बजट में राज्य के लिए केन्द्रीय करों में 46 हजार 411 करोड़ रूपये का प्रावधान रखा था, जिसे परिवर्तित बजट में घटाकर 44 हजार 461 करोड़ रूपये कर दिया। इस प्रकार प्रदेश को 1950 करोड़ रूपये की कटौती झेलनी पड़ रही है। इस कटौती के बाद राज्य को मिलने वाली मासिक हिस्सा राशि में भी करीब 118 करोड़ रूपए कम दिए जा रहे हैं। 

पारस्परिक सहयोग से संचालित होगा अलवर में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज  
बैठक में अलवर में लंबे समय से अनुपयोगी पड़े ईएसआईसी के मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भवन को राज्य सरकार तथा ईएसआईसी द्वारा आपसी सहयोग से संचालित किए जाने पर सहमति बनी। गहलोत ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा था कि ईएसआईसी द्वारा करीब 900 करोड़ रूपये की लागत से बने इस अस्पताल व मेडिकल कॉलेज भवन का लोगों को लाभ मिलना चाहिए। इसके लिए मेडिकल कॉलेज को समझौता कर आपसी सहयोग से चलाया जा सकता है। 
बीबीएमबी में राजस्थान से पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त हो : मुख्यमंत्री ने भाखड़ा-ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड में राजस्थान को सदस्यता से वंचित रखने पर आपाि जताते हुए कहा कि राजस्थान के लिए पूर्णकालिक सदस्य के एक और पद का सृजन किया जाए। उन्होंने रोपड़, हरिके एवं फिरोजपुर सिंचाई हैडवक्र्स का नियंत्रण बीबीएमबी को सौंपने का आग्रह किया। 

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